निवेश और प्रगति के नए युग की शुरुआत
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पिछले दो वर्षों में 65,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विश्वास और आत्मविश्वास की वृद्धि हुई है। 2019 के बाद पहली बार विदेशी निवेश (एफडीआई) जम्मू-कश्मीर में आया है, और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां यहां निवेश करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने यह भी कहा 2023 में 2 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा की, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला।
राष्ट्रीय पुनर्जागरण की दिशा में एक कदम
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का यह रूपांतरण केवल क्षेत्रीय बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत के राष्ट्रीय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सुनिश्चित किया कि इस बदलाव का असर पूरे देश पर पड़ेगा और देश अब वैश्विक स्तर पर निवेश और अवसरों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
युवाओं से अपील की राष्ट्रवाद हमारी पहचान है और हमारा परम कर्तव्य है कि हम राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखें। कोई भी राजनीतिक या व्यक्तिगत स्वार्थ राष्ट्रहित से बड़ा नहीं हो सकता। नागरिक कर्तव्यों के पालन पर भी जोर दिया और कहा कि यह देश को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।
इस दीक्षांत समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला, शिक्षा मंत्री सकीना मसूद और अन्य गणमान्य व्यक्तियां उपस्थित थीं।
अपने संबोधन का समापन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा परिवर्तन की हवाओं ने शांति और प्रगति का संदेश दिया है। आइए, हम जम्मू-कश्मीर और भारत के लिए एक नई सुबह के निर्माता बनें।