जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) मुमताज अहमद की निवारक हिरासत को सही ठहराया है। कोर्ट ने रिट पर पहले के आदेश के खिलाफ दायर उनकी लेटर्स पेटेंट अपील को खारिज कर दिया।
चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला दिया। लोक सुरक्षा अधिनियम-1978 की धारा 8 के तहत जिला मजिस्ट्रेट, पुंछ ने 26 जुलाई, 2024 को आरोपी की निवारक हिरासत का आदेश दिया था। अपीलकर्ता ने मुख्य रूप से दो आधारों पर अपनी हिरासत को चुनौती दी थी। पहला आधार यह था कि हिरासत में लेने वाले अधिकारियों की ओर से उसे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। दूसरा यह कि हिरासत के आधार केवल पुलिस डोजियर की हूबहू नकल थे। इससे साफ होता है कि अधिकारियों ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया।
केंद्र शासित प्रदेश की ओर से सीनियर एएजी ने मुमताज अहमद के आतंकी समूहों को लॉजिस्टिक सहायता (साजो-सामान की मदद) पहुंचाने और पुंछ जिले में सुरक्षा बलों की आवाजाही से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का हवाला देते हुए अपील का विरोध किया।
अदालत ने रिकॉर्ड में दर्ज किया कि अपीलकर्ता पर आतंकी ऑपरेटिव हक नवाज के साथ भी संबंध होने का आरोप है। बता दें कि हक नवाज 2023 के तोता वाली गली हमले का आरोपी है जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। जेएनएफ