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113 करोड़ के जेकेसीए घोटाले की जांच करेगी सीबीआई

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जेएंडके हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) में 113 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एनपाल वसंथा कुमार और न्यायाधीश बंसी लाल भट्ट की खंडपीठ ने अब तक की पुलिस जांच पर असंतोष जताया है।
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खंडपीठ ने यह फैसला क्रिकेटर माजिद याकूब डार और निसार अहमद खान की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया। वर्ष 2012 में पूर्व मुख्यमंत्री एवं जेकेसीए के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये के फंड के हेराफेरी का मामला सामने आया था।

न्यायालय ने जांच के लिए सीबीआई को बीसीसीआई के मुंबई हेडक्वार्टर और अन्य एजेंसियों से मदद लेने को कहा है। साथ ही जांच छह माह में पूरी करने को भी कहा है।
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खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिए कि आदेश की कापी सीबीआई के निदेशक को भेजी जाए और कम से कम समय में जांच पूरी की जाए। याचिका में कहा गया कि क्राइम ब्रांच चूंकि प्रदेश के गृह विभाग का विंग है, इसलिए जांच में न्याय नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने आदेश में कहा, ‘यह सच्चाई है कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे हैं। उनका राजनीतिक कद भी काफी ऊंचा है। उन पर दो विरोधाभासी प्रस्तावों पर अनुमति देने का भी आरोप है।

ऐसे में जरूरी है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।’ चूंकि गबन किया गया धन मुंबई से बीसीसीआई से आया है। क्राइम ब्रांच का अधिकार क्षेत्र सिर्फ रियासत तक ही सीमित है, इसलिए उसे जांच में काफी परेशानियां हो सकती हैं।

क्या है मामला?

- जेकेसीए की वर्किंग कमेटी के कुछ सदस्यों ने पूर्व पदाधिकारी मोहम्मद असलम गोनी, सलीम खान और अहसान मिर्जा के खिलाफ कुछ बोगस बैंक अकाउंट का संचालन करने के आरोप लगाए।
- एसोसिएशन के वर्तमान कोषाध्यक्ष मंजूर अहमद वजीर ने सबसे पहले फंड में हेराफेरी को देखा। उन्होंने इसकी जानकारी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को दी।
- फारूक ने चेयरमैन असलम गोनी को मामले की जांच करने को कहा। गोनी ने श्रीनगर में पदाधिकारियों की बैठक बुलाई।
- पूर्व कोषाध्यक्ष एहसान मिर्जा ने एसोसिएशन के फंड की कमी को स्वीकार किया और 31 मार्च 2012 तक 1.5 करोड़ की पहली किश्त देने का वादा किया।
- मिर्जा के लिखित बयान को गोनी ने डॉ. अब्दुल्ला को सौंपा। अध्यक्ष ने इस पर मिर्जा और सलीम खान के खिलाफ राम मुंशी बाग थाना, श्रीनगर में 10 मार्च 2012 को आरपीसी की धारा 406, 120-बी, 167, 477 (ए) के तहत एफआईआर (नंबर 27/2012) दर्ज करवाई।
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सदस्यों ने इन हाउस जांच की मांग की

घोटाला प्रकाश में आने के बाद एसोसिएशन के ज्यादातर सदस्यों का मानना था कि चेयरमैन की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। इस पर डॉ. फारूक से आग्रह किया गया कि मामले की ‘इन हाउस’ जांच करवाई जाए।

इस पर अरविंदर सिंह मिक्की, श्याम स्वरूप कलसोत्रा, मोहम्मद अशरफ भट और अशविंदर कौल की सलाहकार कमेटी को जांच का जिम्मा सौंपा गया। कोषाध्यक्ष मंजूर अहमद वजीर को कमेटी का संयोजक बनाया गया।

कमेटी ने पुलिस द्वारा जब्त कैश बुक व डे बुक को अपने कब्जे में लिया। जिसमें 40,53,48,784 रुपये का लेनदेन हुआ था। जांच में पाया गया कि पूर्व कोषाध्यक्ष एहसान मिर्जा ने नए कोषाध्यक्ष को बैंक से संबंधित तमाम कागजात और सीसीआर नहीं सौंपे।
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