2024 में संभावनाएं
2024 के विधानसभा चुनाव में मुख्य पार्टियां महिलाओं को टिकट देने के वादे के साथ मैदान में हैं। भाजपा, नेकां, और पीडीपी जैसे प्रमुख दल महिला उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।लेकिन वास्तविक बदलाव तब ही संभव होगा जब महिलाएं निर्णायक भूमिका में आएं।
1972 से अब तक जम्मू-कश्मीर में महिलाओं का चुनावी सफर
1972 में चार महिलाएं विधायक चुनी गईं, जिनमें राजदुलारी हंडू और सरोजिनी योगाचार्य प्रमुख हैं।
1987 में यह रुझान जारी रहा और सजिदा बेगम और आशा ज़रीना जैसी विधायकों का चयन हुआ।
2002 में महबूबा मुफ़्ती और शांति देवी जैसी प्रमुख महिलाएं विधानसभा में पहुंचीं।
2024 में मुख्य पार्टियों के घोषित महिला चेहरे
भाजपा- एक किश्तवाड़ से शगुन परिहार
नेकां- तीन : हव्वाकदल से शमीम फिरदौस, टीएच पोरा सकीना इत्तू, पाडर नागसेनी से पूजा ठाकुर
पीडीपी-दो : हजरतबल से आशिया निकास, विजबिहाड़ा से इल्तिजा मुफ्ती
राजनीतिक विशेषज्ञ जोर दे रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में महिलाओं के नेतृत्व कौशल को विकसित करना बेहद जरूरी है। विधानसभा में महिलाओं के लगातार कम प्रतिनिधित्व से यह स्पष्ट होता है कि महिला नेताओं को सशक्त बनाने के लिए लक्षित पहलों की आवश्यकता है।
हालांकि चुनौतियां बड़ी हैं, जम्मू-कश्मीर की राजनीति में महिलाओं की कहानी एक तरह की दृढ़ता की है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं का विधानसभा में प्रतिनिधित्व केवल औपचारिकता से बढ़कर वास्तविक प्रभाव में तब्दील होने के लिए अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है।