जम्मू-कश्मीर में नामित विधायक बनने के लिए कई दावेदार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इन दावेदारों में से कई खुद को पीओजेके विस्थापित बता रहे हैं, जबकि कश्मीरी पंडित महिला कोटे से नामांकन के लिए भी कई नाम सामने आ रहे हैं
जम्मू-कश्मीर में नामित विधायकों की कुर्सी के लिए दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। कई उम्मीदवार खुद को पीओजेके (पाकिस्तानी अधीकृत जम्मू-कश्मीर) विस्थापित के रूप में स्थापित करने में जुटे हैं, जबकि कश्मीरी पंडित महिला कोटे के लिए भी पंडितों के टाइटल का उपयोग होने लगा है। इस बीच, सत्ताधारी दल में नामित विधायकों के लिए लंबी फेहरिस्त तैयार की जा रही है।
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सूत्रों के अनुसार, नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ कई चेहरे सामने आ रहे हैं। पीओजेके रिफ्यूजी कोटे से नामित विधायक बनने के लिए अशोक पंडित, सुनील सेठी, लब्बा राम गांधी, गुरमीत कौर रंधावा और राजेंद्र सिंह चिब जैसे नाम चर्चा में हैं। हालांकि, रिफ्यूजियों की संस्था एसओएस ने दलगत आधार पर नामांकन का विरोध किया है। उनका कहना है कि किसी पार्टी से जुड़े रिफ्यूजी के बजाय समुदाय के सक्रिय लोगों को नामित किया जाना चाहिए।
इसी प्रकार, कश्मीरी पंडित कोटे से नामांकन के लिए मोती कौल, गिरधारी लाल रैना और अजय भारती जैसे नाम प्रमुखता से उठ रहे हैं। विशेष रूप से, एक सीट कश्मीरी पंडित महिलाओं के लिए आरक्षित है, जिसके लिए एक महिला नेता ने अपने नाम के साथ कश्मीरी टाइटल जोड़ना शुरू कर दिया है। यह महिला जम्मू में एक डोगरा परिवार में शादीशुदा हैं, लेकिन उनका जन्म कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था।
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इसके अलावा, दो सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिसके लिए पार्टी में सक्रिय कई नेताओं ने पार्टी के बड़े नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने इस बारे में बयान देते हुए कहा कि अभी तक किसी भी नाम पर विचार नहीं किया गया है और न ही किसी नाम पर बातचीत हुई है। इस स्थिति में, नामित विधायकों की इस दौड़ में उम्मीदवारों की सक्रियता आगामी चुनावों के लिए एक नई राजनीति की दिशा तय कर सकती है। जैसे-जैसे नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, राजनीतिक समीकरणों में और बदलाव आने की संभावना है।