सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उनकी सरकार चाहती है कि अफस्पा जैसे कानून हटने चाहिए। इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है। लेकिन खेद है कि हिंसा से सुरक्षाबल अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। उन्होंने लोगों से शांति की अपील की ताकि जमीन पर सकारात्मक परिवर्तन दिख सके।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि घाटी में कानून व्यवस्था के खराब होते हालात की वजह से सेना का दखल बढ़ा है। यदि हालात खराब होंगे तो सेना का दखल बढ़ेगा। यदि आतंकवाद तथा पत्थरबाजी बढ़ी तो पुलिस का दखल बढ़ेंगे। हम यह नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि लोगों को निराशा से बाहर लाने के लिए राजनीतिक पहुंच होना चाहिए। इसमें मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की प्रमुख भूमिका है। विधानसभा में शुक्रवार को गृह विभाग के ग्रांट पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बातचीत राज्य सरकार का मुख्य दर्शन है।
इस पर लंबे समय तक जोर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय वार्ताकार की नियुक्ति की गई। ऐसी आशा है कि राज्य में सभी विचारधारा के लोग हिंसा के चलते उभरती स्थितियों को समझेंगे। साथ ही राज्य में हिंसा और अनिश्चितता के चक्र को खत्म करने के लिए वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा द्वारा शुरू की गई बातचीत प्रक्रिया में शामिल होेंगे।
हिलिंग टच के प्रयासों पर कहा कि उनकी सरकार ने 9700 से अधिक युवाओं के खिलाफ मामलों को वापस लेने की पहल की है, जिनके खिलाफ 2008 से पत्थरबाजी के मामले लंबित थे। सरकार और अधिक युवाओं के खिलाफ इसी तरह के मामलों की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों की एक ही सोच है।