जम्मू संभाग में बिजली चोरी के कारण राजस्व को घाटा हो रहा है। लाइन लॉस बढ़ता जा रहा है। यह 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी पहुंच गया है। इसे रोक पाने में बिजली निगम नाकाम है। निगम के पास 40 फीसदी बिजली का ही हिसाब है, 60 प्रतिशत बिजली कहां और कौन खर्च कर रहा है, इसका पता नहीं। जम्मू संभाग में 100 करोड़ की बिजली आपूर्ति प्रतिमाह की जाती है।
इसमें 40 करोड़ का ही हिसाब है। इसी तरह जम्मू जिले में दस करोड़ रुपये की बिजली की आपूर्ति होती है। यहां पर भी चार करोड़ के आसपास राजस्व आ रहा है। निगम के अनुसार बिजली चोरी के कारण लाइन लॉस बढ़ा है। हालांकि पहले कारपोरेशन ने बिजली चोरी के खिलाफ सख्ती की थी। मीटर रीडर पर भी कार्रवाई अमल में लाई गई थी। इसके बावजूद मुख्य तारों से लिए गए अवैध कनेक्शन अभी तक नहीं हट पाए हैं।
मिलीभगत की बू
लोगों ने गर्मी से बचने के लिए घरों में एसी, कूलर लगा रखे हैं। कायदे से इनका बिल तीन हजार रुपये प्रति माह के आसपास आना चाहिए। मगर सांठ-गांठ कर सौ से तीन सौ रुपये अदा कर बिजली प्रयोग में लाई जा रही है। सर्दी के मौसम में लोगों ने हीटरों के लिए अलग से कनेक्शन ले रखे हैं। इनका सौ रुपये प्रति माह अदा किया जाता है। मगर मीटर के हिसाब से बिल हजार रुपये से कम नहीं आना चाहिए। इन कारणों से भी लाइन लॉस बढ़ गया है।
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लोगों ने मीटर वायर से ही अवैध कनेक्शन लिए हैं। मीटर रीडिंग चेक करने पर कम आती है। ऐसे में लोग भारी भरकम बिल अदा करने से बच रहे हैं। बिजली चोरी पर लगाम लगाने पर सख्ती की जा रही है। जांच के लिए टीमों का गठन किया गया है। अवैध कनेक्शनों को काटा जाएगा। लोगों को मीटर रीडिंग के हिसाब से ही बिल अदा करना होगा।
- गुरमीत सिंह, एमडी, बिजली निगम