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बाढ़ के इन घावों को भरने में लगेंगे कई साल

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सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ ने जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था की चूलें हिला दीं हैं। रियासत की आर्थिक स्थिति पहले से ही खस्ताहाल है और अब सैलाब ने जो गहरे घाव दिए हैं, उसे भरने में कई साल लग सकते हैं। केंद्र सरकार ने अबतक 2100 करोड़ की मदद दी है जो मूलत: राहत कार्यो और जरूरी खर्चों के लिए है।
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ध्वस्त इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने के लिए महात्वाकांक्षी योजनाएं शुरू करने की जरुरत होगी। रियासत सरकार शुरू से ही केंद्रीय सहायता पर निर्भर रही है। विकास योजनाओं के ढ़ांचे और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए फिर से केंद्र की बैसाखी की जरुरत होगी।

टूटी कश्मीरी अर्थव्यवस्‍था की रीढ़

मुख्य सचिव मोहम्मद इकबाल खांडे ने अमर उजाला को बताया कि बाढ़ से सिर्फ श्रीनगर शहर ही नहीं उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर में भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट गई है। रोजगार के साधन चौपट हो गए हैं। सेब और अन्य फलों का कारोबार लगभग चार हजार करोड़ का होता है जो इस बार लगभग शून्य पर पहुंच गया है।

फसलें बरबाद हो गई है। करीब चालीस से पचास हजार मकान गिरने के खबर है। अभी तमाम आंकड़े ही जुटाए जा रहे हैं। इस वक्त नुकसान को राशि में बता पाना संभव नहीं है। नुकसान जम्मू संभाग के जम्मू, राजोरी और पुंछ में भी हुआ है। सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मिल जाने के बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

रेलवे, बिजली और उद्योग को भारी नुकसान

दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग प्रमुख जिला है वहां 56 से अधिक गांव और शहर के 18 मोहल्ले पूरी तरह तबाह हुए हैं। अनंतनाग के अलावा पुलवामा, कुलगाम और शोपियां जिले में भी बाढ़ की तबाही अर्थव्यवस्था पर गहरे जख्म दे गई है।

बकौल मुख्य सचिव अभी सारा ध्यान राशन की व्यवस्था और जरूरी संरचनाओं को खड़ा करने पर है। रेलवे, बिजली संरचना और प्रोजेक्ट, उद्योग जैसे क्षेत्रों में बड़ी नुकसान हुआ है।

इंफ्रास्ट्रक्चर को फिलहाल कामचलाऊ बनाया जा रहा है। इसे पटरी पर लाने में हजारों करोड़ खर्च हो सकते हैं। पर्यटन के आधारभूत संरचना को भी तबाही झेलना पड़ी है।
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बाढ़ के बाद पर्यटन भी प्रभावित

बाढ़ के बाद धार्मिक पर्यटन भी प्रभावित है। नवरात्र पर इस बार वैष्णों देवी की यात्रा पर भी असर पड़ेगा जो अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा। सर्दियों में कश्मीर घाटी में पर्यटक घट जाते हैं लेकिन बाढ़ के बाद इस बार इसमें और कमी आ सकती है। व्यापार और होटल उद्योग इससे प्रभावित होंगे।

जम्मू कश्मीर खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण पहले ही बाजार से 300 करोड़ का ऋण ले चुका है। आंतरिक संसाधनों से वेतन और अन्य बिलों के भुगतान के लिए किसी तरह 1100 करोड़ रुपये दो माह पहले जारी किए गए थे। आर्थिक संकट से जूझ रही रियासत को बाढ़ की मार अभी अगले कई साल तक झेलनी पडे़गी।
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