पीएम मोदी का इजराइल दौरा भले ही हिंदुस्तान के भविष्य की सामरिक चुनौतियों लिहाज से महत्वपूर्ण कहा जा रहा हो लेकिन दोनों देशों के मध्य मित्रता की कहानी कुछ 18 साल पहले की भारत पाक जंग के वक्त से ही इतिहास में दर्ज है। वक्त साल 1999 का था, जब जम्मू कश्मीर के कारगिल में भारत पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी हुई थी।
पाकिस्तानी सेना की शह पर जब जेहादियों की फौज ने हिंदुस्तान की अस्मिता पर आंख उठाने की कोशिश की तो सामरिक स्थितियों के उस वक्त इजराइल ने भारत का साथ दिया। उस वक्त भारतीय सेना के जवान जमीनी रास्ते से पाकिस्तान के नापाक सैनिकों को खदेड़ने में जुटे थे।
इस दौरान चुनौती यह भी थी कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों के उन ठिकानों को कैसे ध्वस्त किया जाए जहां पाकिस्तानी सैन्य घुसपैठियों ने अपनी पैठ बना रखी थी। भारतीय वायुसेना की चुनौती ये थी कि भारतीय लड़ाकू विमानों में सटीक निशाना लगाने वाली शस्त्र प्रणालियां नहीं थीं।
1999 में हिंदुस्तान का बड़ा साथी बनकर उभरा इजराइल
इजराइल दौरे के दौरान पीएम मोदी
- फोटो : फाइल फोटो
साल 1992 में भारत और इजराइल के बीच संबंध नए सिरे से परिभाषित हुए। इन संबंधों के ही 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेल अवीव पहुंचें। वर्ष 1992 के बाद 1999 का दौर एक ऐसा समय था जब भारत और इजराइल फिर से करीब आए। इस दौरान भारत की विदेश नीति में अमेरिका और इजराइल के साथ संबंधों को गहरा करने पर जोर दिया गया। इसी समय कारगिल की जंग हुई और इजराइल भारत का एक मददगार साथी बनकर उभरा।
इजराइली तकनीकी से वायुसेना को मिली थी मदद
प्रतीकात्मक चित्र
कारगिल युद्ध के समय में इजराइल ने हिंदुस्तान को हथियार और लेजर गाइडेड मिसाइलें मुहैया कराई थी। इजराइल ने भारत को जो उपकरण मुहैया कराए सबसे महत्वपूर्ण लेजर गाइडेड मिसाइल्स थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल पर भारत को इन सामरिक सामग्रियों के आपूर्ति न करने का वैश्विक दबाव था लेकिन इन सब के बावजूद इजराइली सरकार ने भारत को ये उपकरण मुहैया कराए।
इजराइली तकनीक के इस्तेमाल से भारतीय वायुसेना को बड़ी मदद मिली और पाकिस्तान के तमाम बंकरों को सटीक गोलाबारी के जरिए तबाह करने में सफलता मिली। इसके अलावा इजराइल ने ड्रोन और अन्य महत्वपूर्ण हथियारों की आपूर्ति की जिससे भारत को सामरिक तौर पर काफी सफलता मिल सकी।