गृहमंत्री राजनाथ सिंह जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की घटना में भले 25 फीसदी कमी का दावा कर रहे हों मगर घाटी से बहुत अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। केंद्र सरकार को मिली ताजा खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई घाटी के चुनिंदा अलगाववादी नेताओं की हत्या की साजिश पर काम कर रही है।
आईएसआई को यह लग रहा है कि अलगाववादी नेता उसके एजेंडे पर काम नहीं कर पा रहे हैं। इसे घाटी को अशांत और तनावपूर्ण रखने की आईएसआई की व्यापक साजिश का एक हिस्सा माना जा रहा है।
राज्य में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद अलगाववादियों को किसी भी फैसले में भागीदार नहीं बनाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने भी यह साफ कर दिया है कि केंद्र की ओर से अलगाववादियों से कोई बातचीत नहीं की जाएगी।
गृहमंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि आईएसआई कुछ अलगाववादियों की हत्या करवाकर घाटी का माहौल बिगाड़ना चाहता है। राज्य के खुफिया सूत्रों से मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) को मिली जानकारियों की उच्च स्तर पर गंभीर समीक्षा की जा रही है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि आईएसआई के निशाने पर कौन कौन अलगाववादी नेता हैं।
पिछले 10 दिनों में छह लोगों की हत्या
इस मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक आईएसआई की यह कारगुजारी कोई नई नहीं है। 18 अक्तूबर 2005 में घाटी में मौजूद आईएसआई के गुर्गों ने आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कद्दावर नेता गुलाम नबी लोन की हत्या कर दी थी।
इस हत्या पर भड़के लोगों ने सुरक्षा एजेंसियों पर लोन को पूरी सुरक्षा नहीं देने की तोहमत लगाते हुए बवाल किया था। सूत्रों के मुताबिक पिछले 10 दिनों में छह लोगों की हत्या और सोपोर जैसे संवेदनशील शहरों में आए दिन हो रही घटनाओं के पीछे बड़ी साजिश नजर आ रही है।
घाटी के मोबाइल संचार टावरों को ध्वस्त करने की घटना भी उसी का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी और आईएस का झंडा लहराकर सुरक्षा एजेंसियों को भड़काने की कोशिश की जा रही है।
अलगाववादियों की जमीन लगातार खिसक रही
गौरतलब है कि पिछले दिनों हुर्रियत नेता यासीन मलिक ने जेल भरो अभियान यह कह कर शुरू किया था कि राज्य और केंद्र सरकारें अलगाववादियों की राजनीतिक जमीन खत्म कर रहीं हैं, लेकिन, मलिक के इस आह्वान का कोई खास असर नहीं हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, दरअसल इन अलगाववादियों की जमीन लगातार खिसक रही है। राज्य में सफल चुनाव और सरकार गठन के बाद अलगाववादियों की सभाओं में पहले जैसी भीड़ एकत्र नहीं हो रही है। यही वजह है कि सैयद अली शाह गिलानी को कई बार सभा करने की अनुमति प्रशासन ने दी।
सूत्रों ने बताया कि इसका असल मकसद था कि इन नेताओं की अपने ठोस जनाधार की गलतफहमी खत्म हो जाए ,लेकिन, आईएसआई अपने कमजोर प्यादों की हत्या कर उनका इस्तेमाल नए तरीके से करने की साजिश पर गंभीरता से काम कर रही है।