इंटरनेट का ज्यादा नशा भी शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर बनाता है। दुनिया से जुड़ने के लिए तकनीक का सहारा लेना ठीक है। लेकिन कोई भी काम क्षमता से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके विपरीत परिणाम आते हैं।
जम्मू विश्वविद्यालय में चल रही हेल्थ साइकोलाजी पर अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस में यह तथ्य सामने आए। इसमें देश विदेश से विशेषज्ञों ने शोध पत्र पढ़े। इसके अलावा अनुभवों का भी आदान प्रदान किया गया।
कश्मीर विश्वविद्यालय के असीमेह रहमान और तोसीफ रिजवी ने कहा कि कश्मीर के युवाओं में इंटरनेट की लत बढ़ी है। इसका मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर प्रभाव पड़ रहा है।
वुमेन सेंटर, सैन फ्रांससिसको स्टेट यूनिवर्सिटी यूएसए की पूर्व सह निदेशक प्रो. सारदा श्रीदेवी ने कहा कि साइकोलाजी समस्याओं को गंभीरता से लेकर काम किया जाना चाहिए।
दौड़ती जिंदगी और आधुनिकीकरण में अधिकांश समस्याएं मानसिक स्तर से जुड़ी हैं। इस दौरान जम्मू संभाग के मुद्दों से जुड़े कई पेपर पढ़े गए। दूसरे दिन अतिथियों के लिए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।