घराना वेटलैंड में तलाब पर मंडराते प्रवासी पक्षी।
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अखनूर
जम्मू से 22 किलोमीटर चिनाब के किनारे स्थित अखनूर किले के साथ ही ऐतिहासिक जियोपोता घाट है। इसी जगह पर महाराजा गुलाब सिंह का राजा रंजीत सिंह ने तिलकाभिषेक किया था। यहां भी जम्मू से सुबह जाकर दिन भर पिकनिक मनाकर शाम को लौटा जा सकता है।
पटनीटॉप
जम्मू से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर यह एक शानदार पिकनिक स्पॉट है। प्राकृतिक छटा से भरपूर इस जगह का लुत्फ परिवार के साथ पिकनिक मनाकर लिया जा सकता है।
घराना वेटलैंड
जम्मू से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये वेटलैंड परिंदों से प्यार करने वालों के लिए अनोखी जगह है। आपको अपने परिवार के साथ यहां पिकनिक मनाना जरूर भाएगा।
नत्थाटॉप
सनासर झील और पटनीटॉप के बीच नत्थाटॉप जम्मू से करीब सवा सौ किलोमीटर दूर पड़ता है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखने वाली होती है। पिकनिक मनाने के लिए इससे बेहतर जगह नहीं हो सकती।
जम्मू विश्वविद्यालय वसूलता है पिकनिक फीस
जम्मू विश्वविद्यालय अपने सालाना शुल्क में छात्र-छात्राओं से पिकनिक फीस भी वसूलता है। यह फीस 50 रुपए रखी गई है। इस पिकनिक फंड से विभिन्न विभागों में छात्र-छात्राओं को पिकनिक पर ले जाया जाता है। हालांकि कश्मीर विश्वविद्यालय या क्लस्टर विश्वविद्यालय में इस मद में फीस वसूले जाने का कोई प्रावधान नहीं है।
छात्र नेता और पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री रहे दीपक गुप्ता बताते हैं कि जम्मू विश्वविद्यालय में पिकनिक के हेड में पहले से ही शुल्क वसूला जाता है। विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा के छात्र सन्नक श्रीवत्स कहते हैं कि अलग-अलग विभागों के छात्र-छात्राओं को विभागध्यक्ष सुविधानुसार पिकनिक पर ले जाते हैं। पिछले साल के मुकाबले इस फीस में कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
पिकनिक बच्चों को बनाता है शारीरिक-मानसिक रूप से दुरुस्त
बच्चों को कुछ-कुछ समय के अंतराल पर पिकनिक ले जाया जाए और पिकनिक में अगर बच्चों को ग्रुप बनाकर आउटडोर खेलों में लगाया जाए तो वे शारीरिक-मानसिक रूप से दुरुस्त रहते हैं। उनमें दूसरे बच्चों के साथ मिलकर रहने की आदत विकसित होती है। आत्म-विश्वास बढ़ता है। अगर मां-बाप केवल अपने बच्चाें को पिकनिक ले जा रहे हैं तो मां-बाप को चाहिए कि जितनी देर बच्चों के साथ रहें, मोबाइल को दूर रखें और उनके साथ किसी-न-किसी गतिविधि में शामिल रहें। साथ खेलें और साथ खाएं। इनसे परिवार में भी बांडिंग बढ़ती है।
डॉ. आरती बख्शी, मनोवैज्ञानिक।