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पहले से ही थी फिदायीन हमलों की खुफिया जानकारी

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लश्कर ए ताइबा के आठ आतंकियों के गुट ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के डेरा गाजी खान में डेरा जमा रखा है। पीओके के परसूर, दतसुयाल और सेनसा कैंप से लतीफ और अयातुल्ला समेत करीब 18 फिदायीन आतंकी बसंता नदी के रास्ते अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पार करने की ताक में हैं।
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हाईप्रोफाइल मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) पिछले पंद्रह दिनों में ऐसे कई सटीक खुफिया इनपुट सरकार, बीएसएफ और सेना को दे चुका है। इतना ही नहीं मैक ने यह भी चेताया था कि नवाज शरीफ सरकार की अनदेखी कर पाक सेना और आईएसआई की 20 से 30 मार्च के बीच जम्मू में पुलिस और सेना के कैंपों पर हमला करने की पुख्ता साजिश है।

इन सटीक जानकारी के बावजूद दो दिन पहले सांबा और कठुआ में एक के बाद एक हुए फिदायीन हमले ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है।
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खास बात यह है कि केंद्र ने इस हमले के लिए अब तक आईबी की चौकसी कर रही बीएसएफ और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तैनात सेना से कोई जवाब तलब नहीं किया है।
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पाक अपनी कश्मीर नीति में बदलाव कर रहा है

गृह मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच एक खास समीकरण शक्ल ले रहा है। इस वजह से अब तक शांत बैठी पाक सेना असहज हो रही है।

पाक सेना और आईएसआई की दिक्कत यह है कि पीर पंजाल के ऊपर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की वजह से वह घाटी में ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि कश्मीर के तापमान को गरम रखने के लिए पाक सेना नए पैंतरे आजमा रही है।

गृह मंत्रालय ने इस बात की तस्दीक की है कि विदेश सचिव स्तर की बातचीत और राज्य में सफल लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल होने के बाद पाक सेना अपनी कश्मीर नीति में बदलाव कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक अगर सीमा पर थोड़ी भी ढील बरती गई तो कठुआ और सांबा जैसे हमले जल्द ही दोहराए जाएंगे।
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