जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कवायद तेज की गई है। इसमें औद्योगिक इस्टेट के विस्तार के लिए सिडको और सिकॉप के विलय पर काम किया जा रहा है। इसके साथ जम्मू कश्मीर भूमि विकास अधिनियम, 1970 के तहत उद्योगों को गति देने के लिए नए प्रावधानों पर रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
सरकार ने इसके लिए एक दो सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो इंडस्ट्रियल इस्टेट के बेहतर प्रबंधन के लिए सिडको और सिकॉप के विलय के तौर तरीकों के साथ उक्त अधिनियम के अमल पर अपने सुझाव देगी। कमेटी अपनी रिपोर्ट एक माह के भीतर देगी।
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सिकॉप के अधीन लघु इकाइयां और सिडको के अधीन बड़ी औद्योगिक इकाइयों की जिम्मेदारी है। यह दोनों ही विंग उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अधीन आते हैं। इसमें सैकड़ों स्टाफ काम कर रहा है। दोनों विंगों के विलय का उद्देश्य नई औद्योगिक नीतियों के साथ औद्योगिक इस्टेट का विस्तार करना है।
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इसमें देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से गठित की गई समिति में निदेशक योजना, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग और प्रबंधक निदेशक सिकाप सदस्य बनाए गए हैं। समिति जम्मू कश्मीर विकास अधिनियम 1970 के नए प्रावधानों के लिए प्रस्ताव तैयार करेगी।
सरकार ने उद्योग निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक भूमि आवंटन प्रक्रिया, उद्योग लगाने के लिए एनओसी प्रक्रिया, भूमि बैंक आदि पर काम किया है। इसमें निर्धारित भूमि बैंक पर नई औद्योगिक इस्टेट स्थापित करने के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है।