कोयला अध्यादेश और खदान को निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के चार लाख कर्मचारियों की शुरू हुई हड़ताल अगर लंबी खिंची तो इसका जम्मू कश्मीर में बिजली परिदृश्य पर भी असर पड़ेगा।
बिजली विभाग के अधिकारियों की मानें तो रियासत में अपना तो कोई थर्मल प्लांट नहीं है। जम्मू-कश्मीर में पन बिजली उत्पादन होता है, मगर सर्दियों में दरियाओं और नदियों में जल स्तर कम होने की वजह से करीब 70 फीसदी बिजली उत्तरी ग्रिड के माध्यम से ली जा रही है।
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के चार लाख कर्मचारियों की शुरू हुई हड़ताल का तत्काल तो र्कोई असर रियासत के बिजली परिदृश्य पर नहीं पड़ा है, लेकिन हड़ताल अगर लंबी चली तो उत्तरी ग्रिड से मिलने वाली बिजली पर असर पड़ेगा और इससे रियासत को मिलने वाला कोटा भी कम हो सकता है।
बिजली विभाग की ईएमएंडआरई डिवीजन जम्मू की चीफ इंजीनियर शहनाज गोनी के अनुसार कोयला कर्मचारियों की हड़ताल से संबंधित मसले पर कामर्शियल विंग ही पर्याप्त जानकारी दे सकता है।