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विप चुनाव में निर्दलीय विधायक भी किंग मेकर

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विधान परिषद चुनाव में दो मार्च को होने वाले छह सीटों पर मतदान में एक सीट पर निर्दलीय विधायक किंग मेकर की भूमिका में होंगे। निर्दलीय विधायकों के सहारे नेशनल कांफ्रेंस का उम्मीदवार भी चुनाव जीत सकता है और पीडीपी का उम्मीदवार भी।
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इससे पूर्व राज्यसभा चुनाव में भाजपा-पीडीपी का चक्रव्यूह तोड़कर निर्दलीय विधायकों के सहारे केवल 12 सीटों वाली कांग्रेस के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद नेकां विधायकों के समर्थन से चुनाव जीत गए थे। ठीक कुछ ऐसा ही विप चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। इसलिए पार्टियां निर्दलीय विधायकों से तालमेल बिठानें में लग गई हैं।

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधान परिषद की कुल 11 सीटों में से पांच सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब दो मार्च को छह सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों में जम्मू संभाग की चार और कश्मीर संभाग की दो सीटें शामिल हैं।
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कश्मीर संभाग की दो सीटों पर भाजपा के समर्थन से पीडीपी के दो उम्मीदवार खड़े हैं। इनमें जावेद मिर्चाल और सैफुद्दीन भट्ट शामिल हैं, जबकि कांग्रेस के समर्थन से नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार कैसर जमशेद लोन चुनाव लड़ रहे हैं।
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कश्मीर की एक सीट पर हार-जीत का फैसला निर्दलीय पर निर्भर

कश्मीर संभाग प्रत्येक सीट पर जीत के लिए 29 वोटों की दरकार है, जबकि पीडीपी के 28 के साथ भाजपा के 25 विधायक मिलाकर आंकड़ा 53 पहुंचता है। भाजपा को तीन निर्दलीय विधायकों जिसमें उधमपुर के निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता, पीपुल्स कांफ्रेंस के विधायक सज्जाद लोन और बशीर डार का समर्थन हासिल है।

पीडीपी को झंस्कार के निर्दलीय विधायक सईद बाकिर रिजवी का समर्थन हासिल है। कुल मिलाकर आंकड़ा 57 तक पहुंच रहा है, जबकि कांग्रेस और नेकां विधायकों की संख्या 27 है। ऐसे में एक सीट तो पीडीपी की पक्की है।

दूसरी सीट के लिए पीडीपी उम्मीदवार के पास 28 विधायक हैं, जबकि नेकां उम्मीदवार के पास 27। ऐसे में अगर सीपीआई विधायक एमवाई तारिगामी, निर्दलीय विधायक हाकिम यासीन और लंगेट से निर्दलीय विधायक इंजीनियर अब्दुल रशीद का समर्थन जिस ओर गया, उस पार्टी का उम्मीदवार चुनाव जीत सकता है।

जम्मू संभाग की चार सीटों में जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 18 वोट चाहिएं। ऐसे में भाजपा के दो और पीडीपी के एक उम्मीदवार की जीत पक्की है। बहरहाल नंबर गेम के हिसाब से नेकां उम्मीदवार भी चुनाव जीत सकता है और एक भाजपा उम्मीदवार चुनाव हार सकता है।
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