प्रदर्शनकारी इंटर्न्स का कहना है कि करीब सात वर्षों से उनका स्टाइपेंड नहीं बढ़ाया गया है, जबकि इस दौरान महंगाई बढ़ी है और कई अन्य राज्यों में इंटर्न्स को इससे काफी अधिक स्टाइपेंड मिल रहा है। इंटर्न्स के अनुसार उन्हें 24 घंटे की ड्यूटी, नाइट शिफ्ट और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉ. शाहनवाज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इंटर्न्स को करीब 12,300 रुपये मासिक मिलते हैं, जबकि कई राज्यों में यह राशि 25,000 से 45,000 तक है। उन्होंने कहा कि समान तरह की चिकित्सा सेवाएं देने के बावजूद जम्मू-कश्मीर के इंटर्न्स को करीब 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से स्टाइपेंड मिल रहा है।
इंटर्न्स ने बताया कि वे अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग में आने वाले मरीजों की शुरुआती देखभाल के साथ ओपीडी, वार्ड, प्रक्रियाओं और अन्य चिकित्सा सेवाओं में डॉक्टरों की मदद करते हैं। इसके अलावा उन्हें नाइट शिफ्ट और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ड्यूटी करनी पड़ती है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी डॉ. अभिनव भट्ट ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है और सरकार से लिखित आदेश की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, केवल आश्वासन से अब बात नहीं बनेगी।
इंटर्न्स के अनुसार, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 2023 में गठित समिति ने 2025-26 के लिए स्टाइपेंड करीब 25,000 रुपये करने की सिफारिश की थी। इसके बाद 2026 के विधानसभा सत्र में करीब 26,300 रुपये का प्रस्ताव सामने आया, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हुआ है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें फाइल की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कभी फाइल मुख्यमंत्री के पास तो कभी वित्त विभाग में होने की बात कही जाती है।
इंटर्न्स की ओर से जारी तुलनात्मक आंकड़ों के मुताबिक ओडिशा में इंटर्न्स को 44,319 रुपये, पश्चिम बंगाल में 43,099 रुपये और असम में 35,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है। कर्नाटक में यह राशि 30,000 रुपये, केरल में 27,300 रुपये और दिल्ली व मेघालय में 26,300 रुपये है। वहीं उत्तर प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में 25,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड बताया गया है।
इंटर्न्स का कहना है कि इस तुलना में जम्मू-कश्मीर 12,300 रुपये के साथ सबसे निचले स्तर पर है। प्रदर्शनकारियों ने ‘समान काम, समान समर्पण और उचित स्टाइपेंड’ का संदेश देते हुए कहा कि मांग पूरी होने और संशोधित स्टाइपेंड की औपचारिक अधिसूचना जारी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।