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जम्मू में खपाए जा रहे दिल्ली के बीमार मुर्गे

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दिल्ली-एनसीआर में मुर्गों का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें एंटीबायोटिक दी जा रही है। एंटीबायोटिक देने के बाद इन मुर्गों को जम्मू में खपाया जा रहा है। इससे जम्मू के लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
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शहरवासियों की सेहत का ख्याल रखते हुए निगम ने मामले को गंभीरता से लिया है। निगम ने तय किया है कि अब दिल्ली-एनसीआर से आने वाले मुर्गों को एक दिन रखने के बाद काटा जाए।

निगम इस मामले में ड्रग कंट्रोलिंग एजेंसी की भी सहायता लेगा।

मुर्गों के खून के नमूने लिए जाएंगे

ड्रग कंट्रोलिंग एजेंसी की मदद से इस बात का पता लगाया जाएगा कि शहर में ऐसी एंटीबायोटिक दवाइयों की कितनी खपत है और कहां-कहां इनकी बिक्री हो रही है।

उसके बाद दुकानों से मुर्गों के खून के नमूने लिए जाएंगे, ताकि जांच में यह पता लगाया जा सके कि क्या शहर में इस तरह के मामले हैं या नहीं। जम्मू नगर निगम का वेटरनरी विंग जल्द ही इस अभियान को शुरू करने वाला है।

इससे यह होगा कि अगर मुर्गों को एंटीबायोटिक दी गई होगी तो उसका असर खत्म हो जाएगा और उसके बाद अगर चिकन बेचा जाता है तो खाने वालों को नुकसान नहीं देगा।

जम्मू नगर निगम के वेटरनरी विंग के इंचार्ज डा. जफर इकबाल ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि निगम जल्द ही इस मामले को लेकर व्यापक तौर पर अभियान छेड़ेगा।
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इसलिए होता है एंटीबायोटिक प्रयोग

इसलिए होता है एंटीबायोटिक प्रयोग
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने हाल ही में दिल्ली एनसीआर में किए अपने सर्वे में मुर्गों में भारी मात्रा में एंटीबायोटिक के तत्व पाए हैं। पोल्ट्री उद्योग में इसका व्यापक तौर पर प्रयोग मुर्गों का वजन बढ़ाने के लिए हो रहा है। चिकन खाने वालों के शरीर में ये एंटीबायोटिक लगातार पहुंच रहे हैं।

यह है नुकसान
बीमारियों से लड़ने के लिए दवा के रूप में एंटीबायोटिक दिए जाते हैं। शरीर में लगातार एंटीबायोटिक पहुंचने पर रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया इनसे लड़ने में सक्षम हो जाते हैं, जिससे शरीर पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर खत्म हो जाता है।
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