जम्मू स्थित सीएसआईआर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) ने बड़ी संख्या में कोरोना वायरस से संक्रमित संदिग्धों की त्वरित जांच के लिये एक नया, सरल और कम लागत वाला जांच किट विकसित किया है और अब इसके आकलन और मंजूरी के लिये आईसीएमआर से संपर्क साधा है। आईआईआईएम के निदेशक ने रविवार को यह जानकारी दी।
आईआईआईएम निदेशक डॉ. डी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि नया ‘रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज-लूप मीडियेटेड आइसोथर्मल एम्प्लिफिकेशन’ (आरटी-एलएएमपी) जांच आधारित कोविड-19 जांच किट रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन (आरटी) पद्धति के बाद मानक परिमाणात्मक पीसीआर (क्यूपीसीआर) के विकल्प के तौर पर विकसित किया गया है। पहली दोनों प्रणाली बेहद संवेदनशील हैं लेकिन उनके लिये काफी महंगे उपकरणों की आवश्यकता होती है।
नया आरटी-एलएएमपी जांच आधारित किट आईआईआईएम द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज की साझेदारी में विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने आरटी-एलएएमपी जांच आधारित नैदानिक किट विकसित किया है। हमारी प्रयोगशाला और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेज ने मिलकर यह किट विकसित किया है। उन्होंने कहा कि नया किट आकलन के लिये आईसीएमआर को सौंपा गया है कि फिलहाल वह इसका आकलन कर रहे हैं।
डॉ. रेड्डी ने कहा कि आरटी-एलएएमपी में बेहद परिष्कृत और महंगे उपकरण जैसे पीसीआर मशीन आदि की आवश्यकता नहीं होती जो आरटी-पीसीआर जांच किट के लिये जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिये पीसीआर मशीन की जरूरत नहीं है। इसलिये यह सस्ता और तेज किट (जांच के लिये) होगा। उन्हें इसे मंजूरी देनी होगी। हम बाजार में जाने के लिये मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इस नए जांच किट की कीमत तय की जानी अभी बाकी है लेकिन यह मौजूदा आरटी-पीसीआर मशीनों की लागत से काफी कम होगा।