कश्मीर में ब्याही पाकिस्तानी महिला अलीजा ने सरकार से यहीं रहने देने की अपील की
भट शहजाद
बांदीपोरा। ''''हमने हिंसा को पीछे छोड़ शांति को चुना है। अब हमें क्यों सजा दी जा रही है। एक मां अपनी पांच साल की बेटी के बिना कैसे रह सकती है।'''' ये बातें कहते हुए अलीजा के आंसू छलक पड़ते हैं। वह कहती हैं, दोषियों को सजा दीजिए, लेकिन हमें मत बांटिए। हमें परिवार से अलग कर पाकिस्तान भेजकर मत मारिए। अधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, ऐसी 17 महिलाएं हैं, जिन्हें 29 अप्रैल से पहले घाटी छोड़ने के निर्देश के साथ नोटिस भेजा गया है।
कश्मीर में पूर्व आतंकवादी मोहम्मद रफ़ीक से विवाह करने वाली पाकिस्तान की अलीजा ने सरकार से घाटी में रहने की अनुमति देने की अपील की है। अलीजा ने कहा, हम आठ साल से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। हमारे पास सरकारी दस्तावेज हैं। एक दशक से अधिक समय से कश्मीर में रह रही अलीजा ने कहा कि वह 2010 में शुरू की गई पुनर्वास नीति के तहत आई थीं। इसका उद्देश्य पूर्व आतंकवादियों को फिर से मुख्यधारा में शामिल करना था, जो नियंत्रण रेखा पार कर गए थे।
अलीजा के पति मोहम्मद रफीक कहते हैं, पाकिस्तान जाने के समय मैं 17 साल का था। तब मैं छोटा था और मैंने गलती की। जब पुनर्वास नीति के तहत लौटा, तो मैंने अपने अतीत से सभी संबंध तोड़ लिए। अपनी वापसी के बाद से एक मजदूर के रूप में ईमानदारी से जीवन व्यतीत किया है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने और अपने अतीत को पीछे छोड़ने के लिए अथक परिश्रम कर रहा हूं।
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पूर्व आतंकवादियों की पाकिस्तानी पत्नियों को नोटिस जारी कर उन्हें कश्मीर छोड़ने के लिए कहा है।