वहीं, गुपकार गठबंधन ने प्रशासन की ओर से घोषित मजिस्ट्रेटी जांच में निष्पक्ष जांच होने पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग की। गठबंधन की फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद गठबंधन के प्रवक्ता एम वाई तारिगामी ने पत्रकारों को बताया कि गठबंधन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर विश्वसनीय जांच की मांग की है। हमारी दृष्टि में केवल न्यायिक जांच ही विश्वसनीय और पारदर्शी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से घोषित मजिस्ट्रेटी जांच पारदर्शी नहीं हो सकता है क्योंकि यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, जिसमें आरोपी प्रशासन अपने खिलाफ लगे आरोपों की जांच करेगा। गठबंधन ने देशभर के नेताओं से लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की मांग की है। इस मुद्दे पर चुप्पी उचित नहीं है। हम कश्मीर को कब्रगाह नहीं बनने देंगे। सरकार को आवाज सुननी ही होगी। बैठक में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को छोड़ शेष सभी उपस्थित थे।
परिवार वालों से मिलने की अनुमति नहीं दी
तारिगामी ने आरोप लगाया कि पीएजीडी के नेता शोक संतप्त परिवार वालों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। हर इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए कानूनी सलाह भी ले रहे हैं। हर सभी दरवाजे को खटखटाएंगे।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने दावा किया कि उन्हें घर पर हिरासत में रखा गया है और पार्टी के दो अन्य सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी और प्रवक्ता नजमू साकिब को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि महबूबा नजरबंद नहीं हैं। पुलिस ने बताया कि वह प्रेस इन्क्लेव में धरना में शामिल होने जा रही थी, जिससे उन्हें रोका गया।
मुफ्ती ने अपने आवास के ‘लॉक’ किए गए गेट की तस्वीर साझा की और ट्वीट किया कि फि र से मुझे घर पर हिरासत में रखा गया है और पीडीपी के साकिब और सुहैल बुखारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। हैदरपोरा मुठभेड़ का हवाला देते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि निर्दोष नागरिकों को मानव कवच के रूप में इस्तेमाल करना और फि र उनके परिजन को अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं देना यह दिखाता है कि केंद्र सरकार अमानवीयता की नई गहराई को छू रही है।
हुर्रियत कांफ्रेंस ने हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए दो नागरिकों के परिवारों के समर्थन में 19 नवंबर को बंद का आह्वान किया है। इसने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और मारे गए लोगों के शव लौटाने की मांग की।
हुर्रियत कांफ्रें स ने एक बयान में कहा कि हैदरपोरा मुठभेड़ ने कश्मीर के लोगों को स्तब्ध कर दिया है। अधिकांश नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता इस तरह की अमानवीयता का विरोध करने और मारे गए नागरिकों के परिवारों के साथ एकजुटता दिखाने के कारण जेलों या घरों में नजरबंद हैं। हमारी मांग है कि शवों को दफनाने के लिए उन्हें उनके प्रियजनों को लौटाया जाए। लोगों को खुद ही शुक्रवार को बंद रखना चाहिए।