फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पता नहीं ये आंखें अब कोई मंजर देख भी पाएंगीं या नहीं

Thu, 14 Jul 2016 11:26 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
विज्ञापन
पेलेट गन से जख्मी हुई लड़की - फोटो : Getty Images
विज्ञापन
कश्मीर की हिंसा में जिन घरों के चिराग बुझ गए हैं उनके दर्द का तो कोई पारावार ही नहीं है। आतंकी बुरहान की मौत पर भड़की हिंसा में घाटी में दो हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। लेकिन सवा सौ से ज्यादा ऐसे युवा भी हैं जिनकी आंखों में इस हिंसा के दौरान पेलेट गन से गहरे ज़ख्म लगे हैं। 
विज्ञापन


किसी को नहीं पता कि ये आंखें भविष्य में किसी भी तरह का कोई मंजर देख भी पाएंगी या नहीं। डाक्टरों के अनुसार इन्हें गंभीर चोटें हैं जिनके चलते यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में देख भी पाएंगे या नहीं। इनमें कुछ तो ऐसे भी जिनका हिंसक प्रदर्शनों से कोई लेना-देना ही नहीं था।

श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल (एसएमएचएस) के वार्ड नंबर 7 और 8 में इन मरीजों का इलाज चल रहा है। इनका इलाज कर रहे नेत्र विशेषज्ञ डा. सज्जाद खांडे के अनुसार उनके पास करीब 125 घायल ऐसे पहुंचे हैं जिन्हें आंखों में पेलेट इंजुरी है। 
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

सवा सौ से ज्यादा युवाओं की आंखें पेलेट गन की फायरिंग से ज़ख्मी

- फोटो : Getty Images
इनमें से अब तक 90 का आपरेशन किया जा चुका है। अन्य घायलों का इलाज चल रहा है। जरूरत पड़ने पर उनका भी आपरेशन किया जाएगा। ऐसे ही एक मरीज पुलवामा के खालिद ने बताया कि इलाके में प्रदर्शन चल रहे थे। युवा सड़कों पर उतर आए। इसी दौरान पुलिस ने सीधा निशाना साधते हुए पेलेट गन का इस्तेमाल किया। 

10 वर्षीय तमन्ना के अनुसार उसके इलाके में प्रदर्शन चल रहा था और वह अपने मकान की खिड़की से तमाशा देख रही थी कि अचानक से गोलीबारी शुरू हुई। इस बीच अचानक उसकी बाईं आंख में कुछ आकर लगा और वह गिर पड़ी।

पेलेट गन के प्रयोग पर पहले से ही एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाबंदी लगाने की वकालत की थी। राज्य पुलिस ने इसे गैर घातक बताते हुए प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए जाने को आखिरी रास्ता बताया था। 2014 के चुनाव घोषणापत्र में पीडीपी ने इसका प्रयोग बंद किए जाने पर भी वोट मांगा था। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें