एचआरए के रूप में गलत ढंग से 1.01 लाख रुपये वसूलने के आदेश के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। सीआईडी विभाग में कार्यरत याचिकाकर्ता बिंदू बाला ने 28 अप्रैल, 2009 के आदेश संख्या 67 को खारिज करने की अदालत से अपील की, जिसमें प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता को जारी 1.01 लाख रुपये एचआरए वसूलने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार 1997 में वह सीआईडी सेल नई दिल्ली में तैनात थी, जबकि उसके पति 1996 से ही प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नई दिल्ली में कार्यरत थे। 1997 से एक साथ रह रहे थे। अप्रैल 2005 में पति-पत्नी में किसी बात को लेकर अनबन हो गई और इंदू बाला अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में अलग रहने लगी।
नवंबर 2008 तक वह किराए के मकान में रही और उसके बाद पति से सुलह होने के बाद वह उनके सरकारी आवास पर फिर एक साथ रहने लगे। जस्टिस ताशी राबस्तन ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि मई 2005 से नवंबर 2008 तक अलग आवास पर रहे, लेकिन सीएसआर के शेड्यूल 22 में स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता एचआरए प्राप्त करने की पात्र नहीं है।
इतना ही नहीं, जिस अवधि के दौरान वे अलग-अलग रहे, उस दौरान उनके बीच विवाद का किसी न्यायालय में कोई केस या आदेश नहीं मिला। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता की याचिका को अदालत खारिज करती है।