कश्मीर में लगातार बिगड़ रहे हालात को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रियासत सरकार से स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। सेना अध्यक्ष और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की बैठक के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने घाटी के हालात की समीक्षा की। इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को आनन-फानन में कैबिनेट की बैठक बुलाई।
महबूबा ने आला अधिकारियों के साथ भी समीक्षा बैठकों का सिलसिला अब शुरू किया है। केंद्र रियासत की रिपोर्ट के बाद निर्णय लेगा। केंद्र की वर्तमान रणनीति में भारी बदलाव की संभावना व्यक्त की जा रही है। घाटी में सुनियोजित साजिश के तहत सेना और सुरक्षा बलों की छवि बिगाड़ने के प्रयास चल रहे हैं।
शासन से जुडे़ सूत्रों के मुताबिक इंटरनेट पर प्रतिबंध के बाद अफवाह फैलाने वाले वीडियो के वायरल होने का सिलसिला थोड़ा थमा है, लेकिन उपद्रवियों और अलगाववादियों का नेटवर्क अफवाहें फैला रहा है। मस्जिदों में आफलाइन वीडियो भी दिखाए जा रहे हैं। इस कारण सुरक्षा बलों पर पथराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मौजूदा हालात में मुख्य धारा के सियासी दलों पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के समक्ष भी वजूद का संकट पैदा हुआ है।
श्रीनगर उपचुनाव में महज सात फीसदी मतदान और मतदान के दौरान भारी उपद्रव के बाद सियासी दलों को भी स्थिति की गंभीरता का अहसास हुआ है। इन दलों के सामने अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की चुनौती भी खड़ी हुई है। विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस ने मौजूदा हालात में पत्थरबाजों और अलगाववादियों के सुर में सुर मिलाकर अपनी जमीन बचाने का रास्ता चुन लिया है।
विपक्ष में रहते हुए पीडीपी भी इसी रणनीति पर चलती रही थी। अफजल गुरु की फांसी के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पीडीपी का रुख अलगाववादियों और उपद्रवियों के प्रति नरम रहा था। अब सत्तासीन पीडीपी उन्हीं तत्वों का ही विरोध झेल रही है और इस बार नेकां रणनीति के तहत पत्थरबाजों के साथ खड़ी नजर आती है।