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अब हिजबुल का यह कमांडर है सेना के निशाने पर, इस साल हुआ 89 आतंकियों का काम तमाम

Sat, 25 May 2019 01:18 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
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रियाज नायकू - फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर में दहशतगर्दों के खिलाफ सुरक्षाबल कहर बनकर टूट रहे हैं। इस साल अब तक 89 आतंकियों का काम तमाम हो चुका है। इनमें सभी आतंकी तंजीमों के आतंकी है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई से लगभग सभी तंजीमों को भारी नुकसान पहुंचा है। सेना की ओर से जारी टॉप टेन सूची में शामिल अब हिजबुल कमांडर रियाज नायकू निशाने पर है। वर्ष 2018 में 272 आतंकियों को मार गिराने में सफलता हाथ लगी थी। 
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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस साल अब तक 89 आतंकी मारे जा चुके हैं। 20 आतंकियों को पकड़ने में सफलता मिली है। पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर फिदायीन हमले के बाद अकेले जैश के 28 आतंकी मारे गए। इनमें 14 पाकिस्तानी थे। सुरक्षा बलों की ओर से इस साल चलाए गए आपरेशन में सभी आतंकी तंजीमों जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-ताइबा, हिजबुल मुजाहिदीन, आईएसजेके व अंसार गज्वातुल हिंद को झटका पहुंचा है। घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन के बुरहान ग्रुप का खात्मा हो गया है। 

गत तीन मई को शोपियां जिले के अदखारा गांव में इस ग्रुप के अंतिम आतंकी लतीफ अहमद डार उर्फ लतीफ टाइगर को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। बुरहान ग्रुप में शामिल 11 आतंकियों का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें एक मात्र लतीफ ही बचा था। एक अन्य आतंकी तारिक पंडित को 2016 में सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया था। जैश के टॉप कमांडर पाकिस्तान के खालिद भाई व अंसार गज्वातुल हिंद प्रमुख जाकिर मूसा जैसे बड़े नाम को भी ढेर करने में सफलता मिली है। 
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सबसे अधिक आतंकी दक्षिणी कश्मीर के चार जिलों अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा व कुलगाम में सक्रिय हैं। इनमें स्थानीय आतंकी अधिक हैं। हिजबुल मुजाहिदीन का इस इलाके में खासा प्रभाव है। सूत्रों ने बताया कि यहां लगभग 230 स्थानीय तथा 60 विदेशी आतंकी सक्रिय हैं। उत्तरी कश्मीर में 130 आतंकियों की मौजूदगी की सूचना है, जिसमें ज्यादातर पाकिस्तानी हैं। इसके साथ ही मध्य कश्मीर में भी 15-20 आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना है। 
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इस साल 40 युवा बने आतंकी

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस साल आतंकी संगठनों में भर्ती होने वालों की संख्या में कमी आई है। अब तक 40 युवा आतंक के रास्ते पर गए हैं, जबकि पिछले साल 217 युवा आतंकी संगठनों में भर्ती हुए थे। 2016 से आतंकी संगठनों में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ी है। 2016 में 88 कश्मीरी युवा आतंकी संगठन में भर्ती हुए थे। 2017 में 126 स्थानीय युवाओं ने आतंक का रास्ता थामा।

2018 में आतंकी संगठन में शामिल होने वाले 217 में से 154 दक्षिणी कश्मीर से हैं। इनमें पुलवामा से सबसे अधिक 69 युवा हैं। इससे पहले 2014 में 53 व 2015 में 66 युवाओं ने आतंक का दामन थामा था। 2010 में 54 युवाओं ने बंदूक थामी थी जो 2011 में घटकर 23 पर पहुंच गया। 2012 में 21 व 2013 में 16 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे।  

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा, शोपियां, कुलगाम व अनंतनाग में काफी संख्या में युवा आतंकी संगठनों में भर्ती हुए हैं। हिजबुल मुजाहिदीन तथा लश्कर ए ताइबा ज्यादा से ज्यादा युवाओं को भर्ती करने की फिराक में हैं। हालांकि, इस साल कई आतंकियों के मारे जाने के बाद कई दहशतगर्द हिंसा का रास्ता छोड़कर घर लौट आए। साथ ही मुख्य धारा में शामिल हो गए। अभिभावकों, शिक्षकों तथा बुजुर्गों की मदद से मुख्य धारा में लौटाए जा सके हैं।
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