जम्मू। केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर ‘रचना से मुलाकात’ नामक त्रैमासिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। संपूर्ण राष्ट्र आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। यह कार्यक्रम उसी कड़ी में एक रचनात्मक पहल है।
कोरोना को ध्यान में रखते हुए आयोजन गूगल मीट पर किया जा रहा है। पहली कड़ी का आयोजन कविता पाठ और रचनाकार से मुलाकात के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रसाल सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत किसी चर्चित रचनाकार द्वारा अपनी रचनाओं का पाठ किया जाएगा। साथ ही रचनाकार से शोधार्थी एवं विद्यार्थियों का संवाद भी कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति जिज्ञासा बनी रहेगी।
त्रैमासिक कार्यक्रम की श्रृंखला की पहली कड़ी के रूप में सोमवार को जाने माने कवि, समीक्षक, अर्थशास्त्री और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय विलासपुर के कुलपति प्रो. ए डी एन वाजपेयी ने कविताओं का पाठ किया। उन्होंने मैं तुम्हारे साथ भी हूं, मैं तुम्हारे पास भी हूं से वाहवाही लूटी। काव्य पाठ के बाद उन्होंने शोधार्थियों और विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए रचना-प्रक्रिया के विषय में कहा कि रचना का संबंध अनुभव से है और रचनाकर्म के लिए धड़कता हुआ हृदय चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. वंदना शर्मा ने किया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक डॉ. शशांक शुक्ल, डा. अरबिंद कुमार यादव और डा. रत्नेश कुमार यादव उपस्थित रहे।