मतदान बायकाट की धमकियों के बाद गांदरबल के अतिसंवेदनशील एक मतदान केंद्र को स्कूल की इमारत में शिफ्ट किया गया। कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच सुबह जब मतदान शुरू हुआ तो यहां ज्यादा मतदान नहीं होने की उम्मीद जताई जा रही थी। पिछले लोकसभा चुनाव में इस बूथ पर पहले घंटे में मात्र 65 वोट पड़े थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में इसी केंद्र पर पहले घंटे में ढाई सौ से ज्यादा वोट पड़े।
अलगाववादियों के इस गढ़ में ठंड के बावजूद मतदाताओं का यूं घरों से बाहर निकलना एक अलग संकेत दे रहा है। हालांकि गांदरबल में पिछले विधानसभा चुनाव (51.79 फीसदी मतदान) के मुकाबले इस बार मात्र एक फीसदी ज्यादा (52.97 फीसदी) मतदान हुआ, लेकिन इसे भी उपलब्धि माना जा रहा है।
बकौल मुख्य चुनाव अधिकारी उमंग नरूला इसे मतदाताओं की जीत बताते हैं। उन्होंने कहा कि घाटी में राजनीतिक दलों ने इस बार जिस तरह मतदाताओं को घरों से निकाला, वह उल्लेखनीय है। घाटी की पांचों सीटों पर इस बार 71.40 फीसदी वोट पड़े। इससे लोग हैरान हैं।
खासकर सोनावरी में पिछले चुनाव के 59.64 फीसदी मतदान के मुकाबले इस बार 80.10 फीसदी मतदान आश्चर्यचकित करने वाला है। यही हाल कंगन, बांडीपोरा और गुरेज में रहा। यह भी पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार मतदान ज्यादा हुआ। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रथम चरण के मतदान के दौरान कश्मीर घाटी में किसी तरह की हिंसक वारदात नहीं हुई, जो एक शुभ संकेत है।