हाईकोर्ट ने कहा है कि आंगनबाड़ी में विभागीय परीक्षा के आधार पर ही अगले पद पर पदोन्नति मिल पाएगी। इसमें वरिष्ठता का कोई आधार नहीं होगा।
उक्त फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर ने महमूदा अख्तर की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। इसमें महमूद ने कहा कि प्रतिवादी फरीदा अख्तर आंगनबाड़ी वर्कर के रूप में जुड़ने के दौरान आठवीं पास थी। 1986 में उसने मैट्रिक की परीक्षा पास की।
इस मामले में स्वीकार किया गया कि 1984 में जब महमूदा अख्तर आंगनबाड़ी वर्कर के रूप में जुड़ी तो वह मैट्रिक पास थी। महमूदा अख्तर का चयन हुआ और उसे फरीदा अख्तर से सीनियर मानते हुए सुपरवाइजर बना दिया गया।
बाद में यह आदेश अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। जस्टिस हुसैन ने सुनवाई के दौरान पाया कि आंगनबाड़ी में सुपरवाइज के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से होंगे।
25 फीसदी पद उन वर्करों से भरे जाएंगे, जो ग्रैजुएट होंगी और कम से कम पांच साल सेवाएं दे चुकी होंगी। शेष 25 फीसदी पद उन वर्करों से भरे जाएंगे, जो मैट्रिक होंगी, लेकिन दस साल से सेवाएं प्रदान कर रही होंगी।
कोर्ट ने स्वीकार किया कि नियमों के अनुसार मैट्रिक वर्कर ही सुपरवाइजर पद पर पदोन्नत किए जाएंगे। जिस तिथि को वर्कर ने मैट्रिक पास की होगी, उसी समय से ही वह इस पद के लिए दावेदार होंगे। इसलिए महमूदा अख्तर शैक्षणिक योग्यता के आधार पर दावेदार है। अदालत ने महमूदा की याचिका स्वीकार की।