हाईकोर्ट जम्मू ने अलगाववादियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने की केंद्र और राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में नोटिस जारी कर सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
न्यायाधीश अलोक अराध्य और न्यायाधीश एमके हंजूरा की खंडपीठ ने पाया कि अलगाववादियों के पास सुरक्षा की सारी सुविधाएं हैं। दिवाकर शर्मा ने कोर्ट में जनहित याचिका पेश करके हुर्रियत नेताओं को सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा देने के खिलाफ अपील की थी।
हाईकोर्ट में उनके वकील सुनील सेठी ने दलील में कहा कि हुरियत कांफ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी, तहरीक ए हुर्रियत के मोहम्मद अशरफ सहर, प्रेस सचिव अशरफ सेहरई, सचिव अल्ताफ अहमद शाह, सैयद कासिम शाह बुखारी, आगा सैयद अहमद, अंजुन तबलीक उल इस्लाम के काजी गुलाम मोहम्मद, यासीन हमदानी, जमात ए हमदिया अबुल मनी अजहरी, मौलाना अब्दुल रशीद, साकिब भट्ट, मोहम्मद फारूक, मौलाना अब्दुल रशीद, मसर्रत आलम, सामी उल हक आदि नेताओं पर चिकित्सा सुविधा व सुरक्षा के लिए अन्य खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर मेें 1990 से आतंकवाद है। आतंकी अपने मिशन में लगे हैं। जम्मू कश्मीर में युद्ध जैसे हालात हैं। सरकार की आतंकियों या अलगाववादियों के प्रति कोई भी नीति हो। लेकिन सरकार के इस फैसले से आम जनता के बीच कई सवाल खड़े हुए हैं।
कई बार सरकार सरकारी नौकरीपेशा लोगों को भी सस्पेंड कर देती है। उन्होंने दलील दी कि सरकार किसी कर्मी को आफिस में आनेजाने के लिए वर्दी नहीं देती है, लेकिन अलगाववादियों पर इतना खर्च किया जा रहा है। आम जनता से टैक्स के रूप में पाए गए रुपयों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो रहा है। अलगाववादियों पर भारी रकम खर्च हो रही है।