समाज के हर वर्ग को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए शुरू की गई आयुष योजना के तहत लोगों को उनके पसंद के इलाज की बजाय सिर्फ एलोपैथिक दवाएं दी जा रही हैं।
इस पर सख्त होते हुए हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस देते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। हाई कोर्ट ने यह कदम एक सोसायटी की जनहित याचिका पर उठाया है।
एजूकेशन, सोशल, स्पोर्ट्स व कल्चरल सोसायटी ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर करते हुए कहा था कि आयुष योजना के तहत डाक्टरों पर एलोपैथिक दवाएं लिखने का दबाव बनाया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।
इससे योजना के तहत एक ही छत के नीचे अपने पसंद का इलाज करवाने की मुहिम को धक्का पहुंचा है। इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस बंसी लाल भट की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ सेक्रेटरी और अन्य को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
याचिका में कहा गया कि इस संबंध में मिली शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएचआरसी ने भी राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि आयुष डाक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने से रोकें।
याचिका में प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (आडिट) जम्मू कश्मीर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि एनआरएचएम की ओर से जारी होने वाले फंड में 90 फीसदी की गिरावट आई है। आईएसएम विभाग चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने की बजाय रोजगार सृजन विभाग की तरह काम कर रहा है।