हाईकोर्ट के निर्देश पर जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट ने शहर में लगी धारा 144 में कुछ राहत प्रदान की है। एक अगस्त 2015 को डीएम द्वारा जारी आदेश में नगर निगम हद के अंदर धारा 144 लगाते हुए पांच या उससे अधिक लोगों को एक स्थान पर जमा होने की रोक लगाई थी।
पूर्व के आदेश में कुछ संशोधन करते हुए डीएम ने लोगों के एक स्थान पर जमा होने की रोक को तत्काल प्रभाव से हटा लिया है। यह फैसला हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी एपी सिंह द्वारा धारा 144 लगाने के डीएम के आदेश को चुनौती देते हुए दायर याचिका में अदालती निर्देश पर किया गया।
याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट शेख शकील अहमद और इरफान मोहम्मद खान ने दलील दी कि प्रशासन का यह आदेश दुर्भावना से प्रेरित और असंवैधानिक है। जम्मू में एम्स स्थापना को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी को दबाने के लिए यह कठोर आदेश जारी किया गया।
उनकी दलील थी कि आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा था। एक-दो जो छिटपुट घटनाएं हुईं, वह भी पुलिस द्वारा लोगों को उकसाने का नतीजा थीं। पुलिस ने आंदोलनकारियों को दबाने के लिए उनके वाहनों की तोड़फोड़ की, जिसकी तस्वीरें प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में भी आईं।
इतना ही नहीं, पुलिस ने बार प्रेसीडेंट और एम्स कमेटी के चेयरमैन अभिनव शर्मा को न सिर्फ बुरी तरह पीटा, बल्कि आंसू गैस के गोले छोड़ भय फैलाने की कोशिश की। इस असंवैधानिक आदेश को खारिज किया जाए।
सरकार की ओर से पेश एएजी विशाल शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायतों का निवारण हो चुका है, इसलिए अब यह याचिका खड़ी नहीं होती है।
जस्टिस ताशी राबस्तन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका दायर करने वाले पक्ष को डीएम की ओर से दाखिल हलफनामे में अपना पक्ष रखने को कहा। अदालत ने इसकी अगली सुनवाई के लिए केस को 20 अगस्त 2015 को सूचीबद्ध करने को कहा।