उच्च शिक्षा विभाग में 1651 असिस्टेंट प्रोफेसर पदाें की चयन प्रक्रिया पर रिट कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस एनपाल वसंथाकुमार और जस्टिस आलोक अराधे की डिवीजन बेंच ने मामले संबंधी सभी एलपीए का निपटारा करते हुए लोक सेवा आयोग (पीएससी) को नियमों के अनुसार तत्काल चयन प्रक्रिया को अंजाम देने का आदेश जारी कर दिया।
डिवीजन बेंच ने पाया कि याची पक्ष के साथ ही यदि दूसरे पक्ष की कानूनी वैधता को जांचे तो रोक का आदेश कानून सम्मत साबित नहीं होता। बैंच ने कहा, रिट कोर्ट की जजमेंट को उसके बाद की प्रक्रिया से गुजरना जरूरी है। यदि दूसरी बेंच उससे असहमत हो तो मामले के परीक्षण के लिए उसे बड़ी बेंच को रेफर करना अनिवार्य है।
इस मामले में रिट कोर्ट ने अपने फैसले में हाईकोर्ट के श्रीनगर विंग की जजमेंट का हवाला दिया है, जबकि हाईकोर्ट का वह फैसला निर्धारित समय से पहले आ चुका था। रिट कोर्ट ने अपने फैसले में हाईकोर्ट के विपरीत तर्क शामिल किए हैं जिसके आधार पर रोक का आदेश खारिज किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में दायर याचिकाओं में डिग्री कालेजों में विभिन्न विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की भर्ती संबंधी जेएंडके कालेज सर्विस रिक्रूूटमेंट रूल्स, 2008 का हवाला दिया गया था जिसमें नेशनल इलिजिबिलिटी टेस्ट पास करने की योग्यता नहीं रखने वालों को भी केवल एमफिल के आधार योग्यता दी गई थी। सरकार ने 21 मई 2013 को आदेश जारी कर एमफिल डिग्री धारकों की योग्यता खारिज कर दी थी।