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Hidden Terrorism: दहशतगर्द अपना रहे संरक्षण और समेकन रणनीति, घात लगाकर हमलों को दे रहे अंजाम

Mon, 15 Jul 2024 05:24 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

विदेशी आतंकी संरक्षण और समेकन रणनीति अपना रहे हैं, जिससे एजेंसियों को मुश्किल पेश आ रही है। ऐसा उत्तरी कश्मीर और कठुआ जिले में हाल ही में घात लगाकर हुए हमलों और मुठभेड़ों में देखा गया है।
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सुरक्षाबल - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में 'छिपे हुए आतंकवाद' के चलन की बात सामने आने के बाद से सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। विदेशी आतंकी संरक्षण और समेकन रणनीति अपना रहे हैं, जिससे एजेंसियों को मुश्किल पेश आ रही है। ऐसा उत्तरी कश्मीर और कठुआ जिले में हाल ही में घात लगाकर हुए हमलों और मुठभेड़ों में देखा गया है।

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अधिकारियों का मानना है कि जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी की कमी से ऑपरेशन में बाधा आ रही है। तकनीकी खुफिया जानकारी पर निर्भरता बहुत फलदायी नहीं रही। आतंकी सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए इंटरनेट पर गलत जानकारी देते हैं। 

सुरक्षाबल - फोटो : एजेंसी
जम्मू संभाग में हाल ही में आतंकी घटनाओं में वृद्धि हुई है। खासकर पुंछ, राजोरी, डोडा और रियासी जैसे सीमावर्ती जिलों में आतंकी खतरा ज्यादा बढ़ा है। भारतीय वायुसेना के काफिले, तीर्थयात्रियों की बस पर हमले और कठुआ में सैनिकों की हाल ही में हुई हत्या ने उभरते खतरे को उजागर किया है।

अधिकारी बताते हैं, संरक्षण और समेकन रणनीति के तहत आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर शुरुआत में शांत रहते हैं। स्थानीय आबादी के साथ घुलमिल जाते हैं। हमले करने से पहले पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से निर्देश मिलने का इंतजार करते हैं। 

सुरक्षाबल - फोटो : एजेंसी
आतंकियों की इस रणनीति का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सोपोर में 26 अप्रैल को मुठभेड़ में शामिल रहे विदेशी आतंकवादी 18 महीने से छिपे हुए थे। साक्ष्यों से पता चला कि कश्मीर भर में आतंकवादी समूहों के साथ उनके संबंध थे और वे अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। जून में ऐसे छिपे हुए नेटवर्क को ध्वस्त किया है।
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आतंकी अल्ट्रा सेट फोन जैसे उपकरणों का कर रहे उपयोग

एक अधिकारी के अनुसार आतंकी अल्ट्रा सेट फोन जैसे एन्क्रिप्टेड संचार उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकियों की क्षमताएं भले ही कम हो गई हों, लेकिन उनका इरादा खतरा बना हुआ है। इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां गहनता से जांच में जुटी हैं।
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