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हेलिकॉप्टर हादसा: लापता पायलटों को अंतरराष्ट्रीय मदद से रंजीत सागर झील में खोजेगी सेना

Wed, 11 Aug 2021 01:06 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/कठुआ

सार

झील 25 किलोमीटर लंबी, आठ किलोमीटर चौड़ी और 500 फुट से ज्यादा गहरी है। भारतीय सेना नौसेना के दो अफसरों, चार जेसीओ और 24 अन्य रैंक के जवानों के साथ काम कर रही है। इसके अलावा सेना के दो अफसर, एक जेसीओ और 24 जवान भी जुटे हुए हैं।
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कठुआ हेलिकॉप्टर हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रंजीत सागर झील में हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद से लापता दो पायलटों की तलाश के लिए भारतीय सेना अब अंतरराष्ट्रीय मदद लेने जा रही है। सेना की पश्चिमी कमान ने कहा है कि राहत और बचाव कार्य से जुड़ी देश भर की विभिन्न संस्थाओं का अमला लगातार पायलटों को खोजने में जुटा है।

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बरसात के सीजन की वजह से झील का पानी उथला है, जिसमें नौसेना के सोनार जैसे अत्याधुनिक उपकरण को भी हेलिकॉप्टर के मलबे का पता लगाने में मुश्किल हो रही है। 50 मीटर से ज्यादा गहराई में कुछ भी देख पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। तलाशी अभियान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग मांगा गया है।

सेना की पश्चिमी कमान ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक पायलट के परिजन के ट्वीट के जवाब में कहा है कि झील में 60 बाई 60 मीटर के हिस्से को चिह्नित किया गया है। सेना तलाशी अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। तीन अगस्त से लगातार अभियान युद्ध स्तर पर जारी है।
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तलाशी अभियान में इस्राइल से मदद लेने पर विचार
रंजीत सागर झील में हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद से लापता दो पायलटों की तलाश और तेज कर दी गई है। 60 बाई 60 मीटर के इलाके को चिह्नित करने के बाद अब कोच्ची से बुलाई गई विशेषज्ञ टीमों को झील की सबसे गहराई वाली जगह तलाश करने के लिए उतारा जाएगा। इसी क्षेत्र में सोनार तकनीक का उपयोग भी यह विशेषज्ञ टीम के सदस्य करेंगे। वहीं, तलाशी अभियान को नतीजे तक पहुंचाने के लिए अब इस्राइल की मदद लेने पर विचार चल रहा है।

सूत्रों के अनुसार इस्राइल के पास ज्यादा गहराई में जाकर खोजबीन करने वाले उपकरण हैं, जिन्हें कम वजन के चलते आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है।

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मल्टी बीम सोनार, साइड स्कैनर भी लगाए

तलाशी अभियान में मल्टी बीम सोनार, साइड स्कैनर, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल समेत पानी के नीचे काम करने वाले कई उपकरणों से काम लिया जा रहा है। अत्याधुनिक मशीनों को चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई और कोच्ची से मंगवाया गया है। खराब मौसम में भी सेना, वायुसेना, नौसेना, एनडीआरएफ व अन्य संस्थाएं ऑपरेशन चला रही हैं।

इस ट्वीट से दी अभियान की जानकारी
नील नामक शख्स ने ट्विटर पर लिखा - मेरा भाई कैप्टन जयंत जोशी मंगलवार दो अगस्त को हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद से लापता है। एक सप्ताह बाद भी उन्हें खोजा नहीं जा सका है। तलाशी अभियान बेहद धीमा चल रहा है। मेरी मां ने 40 साल तक सेना में सेवाएं दी हैं। सैन्य परिवार की दूसरी पीढ़ी पिछले एक सप्ताह से ऐसी घड़ी का सामना कर रही है, जहां अब कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही।
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