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अध्ययन में खुलासा : लद्दाख के ठंडे मरुस्थल में कभी आती थी भीषण बाढ़, अध्येताओं ने चेताया

Thu, 17 Jun 2021 04:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

  • जंस्कार और सिंधु नदी के मौजूदा स्तर से 30 मीटर ऊंची उफनती थीं लहरें
  • वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन ज्योलॉजी के वैज्ञानिकों के अध्ययन में खुलासा
  • जलवायु परिवर्तन से भविष्य में भी बिगड़ सकते हैं हालात, बेहतर योजना की जरूरत
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लद्दाख का खूबसूरत नजारा - फोटो : Social media
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विस्तार
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विशेष जलवायु के लिए ठंडे मरुस्थल के रूप में जाना जाने वाला लद्दाख कभी भीषण बाढ़ का केंद्र हुआ करता था। बाढ़ भी ऐसी कि पानी की लहरें नदियों के मौजूदा स्तर से 30 मीटर ऊंचाई तक उफनती थीं। वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन ज्योलॉजी देहरादून के वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की टीम ने गहन अध्ययन के बाद यह खुलासा किया है। 

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टीम के अध्ययन के अनुसार लद्दाख में जिस तरह से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है, भविष्य में बाढ़ आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में शहरी और ग्रामीण योजनाओं को लेकर गंभीर होना पड़ेगा।

अध्ययन के अनुसार भारत की नदियों में बाढ़ के कई कारण होते हैं। ऐसे में केवल सौ साल के इतिहास का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। वाडिया संस्थान की टीम ने लद्दाख के जंस्कार और सिंधु नदी मार्ग पर पिछले तीन से 15 हजार साल के इतिहास में आई बाढ़ का अध्ययन किया। 
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अध्ययन के दौरान जंस्कार और सिंधु नदी के आसपास स्लैक वाटर डिपॉजिट मिले। बारीकी से अध्ययन में कितनी और कब-कब बाढ़ आई, इसका पता लगाया गया। निष्कर्ष में पाया गया कि लद्दाख के मरुस्थल वाले इलाकों में नदी के वर्तमान स्तर से 30 मीटर ऊंची बाढ़ आया करती थी। 

इस क्षेत्र का हजारों वर्ष पूर्व इंसानों ने रहने और शिविर लगाने के लिए इस्तेमाल किया। कुल 15 हजार वर्ष के कालखंड का अध्ययन बताता है कि पहले लद्दाख की जलवायु वर्तमान से काफी गर्म थी, जिससे ग्लेशियर पिघलते और भीषण बाढ़ आती।

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