बाढ़ में सचिवालय के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी नष्ट हो गए। इसमें कर्मचारियों के सर्विस रिकार्ड के अलावा कई मामलों की जांच से संबंधित फाइलें भी शामिल हैं। बाढ़ का पानी सचिवालय के निचले तल में घुसा था।
फाइलों की कई आलमारियां और रैक पानी से बरबाद हुए। टेबुलों पर रखीं कई फाइलें भी पानी में डूब गईं थीं। संबंधित विभागों ने इनमें से कुछ को धूप में सुखाकर बचाने की कोशिश की लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कई अहम फाइलों को बचाया नहीं जा सका।
सचिवालय के अलावा श्रीनगर के अन्य हिस्सों में स्थित विभागों के दफ्तरों और अनंतनाग समेत कुछ जिलों में भी दस्तावेज नष्ट हुए हैं। सैलाब के बाद सचिवालय में कामकाज शुरू होने के महीने बाद अब इन फाइलों की खोजबीन शुरू हुई है।
बाढ़ में नष्ट हो गए सचिवालय के रिकार्ड
नष्ट हुई फाइलों में कई कैश बुक, विथड्रावल रजिस्टर और स्टाक रजिस्टर भी शामिल हैं। गौरतलब है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद श्रीनगर सचिवालय खोले जाने के फरमान जारी हुआ लेकिन इस आदेश के एक पखवारे तक निचले तल की सफाई ही होती रही।
पानी से क्षतिग्रस्त हुईं आलमारियों और रैक पखवारे तक मुख्य द्वार पर पड़े रहे और सचिवालय के अंदर की सड़क की रेलिंग और ठतों पर भीगे फाइल सुखाए जाते रहे।
सरकार का पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्य पर केंद्रित था लिहाजा गायब और नष्ट फाइलों और दस्तावेजों की सुध नहीं ली जा सकी। अब सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित तमाम विभागों से इसका ब्योरा तलब किया है।
कर्मचारियों के सर्विस रिकार्ड और जांच फाइलें बर्बाद
सरकार को भी आशंका है कि बाढ़ के पानी की आड़ में महत्वपूर्ण जांच से संबंधित कुछ फाइलों को गायब किया जा सकता है और कर्मचारियों के सर्विस रिकार्ड में हेराफेरी भी संभव है। घोटालों की जांच से संबंधित फाइलों को बाढ़ के नाम पर गायब भी किया जा सकता है।
लिहाजा इसे रोकने के लिए मैकेनिज्म विकसित किया जा रहा है। फाइलों के नष्ट होने से विकास योजनाओं पर भी असर की आशंका है। पहले भी अग्निकांड में सचिवालय के कई अहम दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं। कई विभागों के रिकार्ड डिजिटलाइज्ड नहीं हैं।
ऐसे में बाढ़ की आड़ में दस्तावेजों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जीएडी ने दिशानिर्देश में कहा है कि जहां कर्मचारियों के सर्विस रिकार्ड नष्ट हुए हैं उसे कर्मी के पास मौजूद फोटोस्टेट सर्विस बुक से मिलान किया जा सकता है।
सरकार ने शुरू की नए दस्तावेज बनाने की कवायद
जन्मतिथि, योग्यता और योगदान तिथि को क्रास-चेक कर डुप्लीकेट सर्विस बुक बनाया जा सकता है। इसकी संपुष्टि एसएसबी और एसएलसी से कराई जा सकती है। ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रोन्नति के बारे में भी कई स्तर पर पुष्टि की व्यवस्था की जा रही है।
फोटोस्टेट भी उपलब्ध नहीं होने पर दस्तावेजों का जानकारियों के आधार पर फिर से निर्माण करना होगा। कोषागार के बिल और बजट प्रस्ताव से भी इसमें मदद ली जाएगी।
किसी मामले में सजा के बारे में जीएडी, विजिलेंस संगठन और प्रशासनिक विभाग से जानकारी एकत्र की जा सकती है। अवकाश प्राप्ति की तिथि को भी क्रास-चेक करने को कहा गया है।
नष्ट सभी दस्तावेजों को उसी हाल में संरक्षित कर उपलब्ध सूचनाओं को कंप्यूटर में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। बहुत पुराने और नए दस्तावेजों की अलग-अलग सूची बनाने को कहा गया है। नष्ट दस्तावेजों की सूची सार्वजनिक करने को भी कहा गया है।