विधानसभा चुनाव की तिथि भले ही घोषित नहीं हुई है, लेकिन चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के खर्च पर नकेल कसने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग की ओर से विस्तृत गाइडलाइन रियासत के मुख्य चुनाव अधिकारी को भेजी गई है।
चुनाव में धन बल के दुरुपयोग को रोकने की दृष्टि से यह पहल की गई है। हाल ही में चुनाव आयुक्त विनोद जुत्शी ने रियासत का दौरा कर बाढ़ के बाद उत्पन्न परिस्थितियों में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों तथा सरकारी मशीनरी केसाथ रायशुमारी कर चुनाव की संभावनाओं को टटोला।
नेकां को छोड़कर अन्य सभी दलों ने समय पर चुनाव कराने की वकालत की है। खुफिया एजेंसियों ने भी दिसंबर में चुनाव के लिए हरी झंडी दे दी है। चुनाव आयुक्त के दौरे के बाद से सरकारी मशीनरी तथा राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
50 हजार से ज्यादा नहीं रख सकेंगे साथ
दिशा-निर्देश में कहा गया है कि कोई भी प्रत्याशी, उसके प्रतिनिधि या समर्थक 50 हजार रुपये से अधिक धनराशि साथ लेकर नहीं चल सकेंगे। प्रत्याशियों को चुनाव से पहले बैंक में खाता खोलवाना होगा। यह खाता स्वयं उसके नाम या उसके चुनाव एजेंट के साथ संयुक्त हो सकता है।
सभी चुनावी खर्चे का भुगतान अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से किया जाएगा। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को यदि किसी सामग्री की खरीद के लिए नकद पैसे का भुगतान करना जरूरी हुआ तो वह एक बार में 20 हजार से अधिक राशि का भुगतान नहीं कर सकेगा।
यह राशि भी संबंधित बैंक खाते से ही निकाली जाएगी। चुनाव के लिए मिलने वाले चंदे तथा सभी प्रकार के स्रोतों से प्राप्त धनराशि भी खाते में जमा करनी होगी।
को-आपरेटिव बैंक, डाकघर में भी खुलेंगे खाते
प्रत्याशी नामांकन से पहले चुनाव खर्च संबंधी खाता रियासत के किसी भी बैंक में खुलवा सकता है। यहां तक कि को-आपरेटिव बैंक तथा डाकघर में भी खाते खोले जा सकते हैं।
इसके लिए सभी बैंकों को अलग से काउंटर खोलने को कहा गया है ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। वहीं, सहायक मुख्य चुनाव अधिकारी जयकुमार का कहना था कि चुनाव खर्च संबंधी आयोग का दिशा-निर्देश प्राप्त हो गया है। इसे सख्ती से लागू करवाया जाएगा।
प्रत्याशियों को नामांकन से पहले अलग खाता खोलना होगा। इसी के जरिये वह चुनाव खर्च संबंधी सभी प्रकार के भुगतान करेगा। चुनाव बीतने के एक महीने बाद ब्योरा निर्वाचन अधिकारी को देना होगा।