रियासी। मदर चाइल्ड मेटरनिटि केयर यूनिट को बनाने का मामला शनिवार को स्वास्थ्य निदेशक के किए गए दौरे के बाद अधर में लटक गया है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों व डेवलपमेंट कमेटी के सदस्यों में भी निराशा है।
शनिवार को स्वास्थ्य निदेशक रेनू शर्मा ने जिला अस्पताल में बनाए गए नए एमरजेंसी वार्ड का दौरा किया। इस दौरान उनके पुराने अस्पताल में भी आने का पता चलने पर डेवलपमेंट कमेटी के सदस्यों के साथ ही स्थानीय नागरिक भी मौके पर जमा हो गए। पुराने अस्पताल की इमारत का निरीक्षण करनेे के बाद स्वास्थ्य निदेशक लोगों से मिलीं। इस दौरान उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। लोगों ने कहा कि पुरजोर मांग पर विभाग की तरफ से इमारत का जीर्णोद्घार किया गया है। इसके साथ ही डाक्टर को भी भेजा गया है। प्रस्तावित मदर चाइल्ड मेटरनिटि यूनिट को चलाने के लिए जल्द से जल्द सभी प्रकार के उपकरणों को उपलब्ध कराया जाए ताकि नगर के लोग स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त कर सके।
स्वास्थ्य निदेशक ने कहा कि मौजूदा समय के दौरान विभाग के पास पर्याप्त फंड्स नहीं हैं जिसके कारण मशीनरी खरीद पाना असंभव है। जब कभी भी विभाग के पास फंड्स उपलब्ध होंगे तो सभी प्रकार की सुविधाएं देने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। इस मौके पर सीएमओ डॉक्टर प्रीतम सिंह व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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जीर्णोद्धार पर खर्च हो गए 40 लाख
रियासी। पांच वर्ष पहले जिला प्रशासन के निर्देश पर रातों रात अस्पताल को अगार बल्लिया माड़ी में शिफ्ट कर दिया गया था, जिसके बाद पुराने अस्पताल के स्थान पर मेटरनिटि यूनिट को बनाने की मांग शुरू की गई। इसके लिए धरना प्रदर्शन भी किए गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जिला विकास बोर्ड की एक बैठक में मेटरनिटि यूनिट को बनाए जाने के निर्देश दिए थे। उनके निधन के बाद सरकार बनने में हुई देरी में कार्रवाई कागजों में ही लटकी रही। गठित की गई डेवलपमेंट कमेटी की तरफ से मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में बनी भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार से भी इसका जल्द निर्माण करने की अपील की गई। सरकार गिर जाने के बाद अधिकारिओं व राज्यपाल के सलाहकारों के साथ संपर्क जारी रखा गया। बीते वर्ष राज्यपाल शासन में मेटरनिटि यूनिट के लिए 31 लोगों का स्टाफ बनाया गया, जिसमें से मौजूदा समय के दौरान दस प्रतिशत भी स्टाफ के सदस्य नहीं पहुंचे हैं। शनिवार को स्वास्थ्य निदेशक की तरफ से जब यह कहा गया कि पर्याप्त फंड्स नहीं हैं। उसके बाद मेटरनिटि यूनिट जल्द बनने की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। हाल ही में इमारत के जीर्णोद्घार पर 40 लाख से भी ज्यादा का खर्च किया गया है।