आईसीएमआर के एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत जम्मू संभाग समेत पूरे प्रदेश में किया गया अध्ययन, जल्द ही इसके नतीजे आएंगे
अरुण कुमार
जम्मू। कश्मीर में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। घाटी में 15 से 40 आयुवर्ग की महिलाएं सबसे ज्यादा शिकार हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस बढ़ती संख्या के पीछे अधिक वसायुक्त भोजन करना प्रमुख कारण है।पूरे प्रदेश में हालात का पता लगाने के लिए पहली बार जम्मू संभाग को भी इस तरह के अध्ययन में शामिल किया गया है। जल्द ही इस अध्ययन की रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सर्वेक्षण व अध्ययन के अनुसार, कश्मीर में 30 फीसदी से भी ज्यादा महिलाएं पीसीओएस से पीड़ित हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की रिपोर्ट के अनुसार घाटी में पीसीओएस के मामले 28.9 प्रतिशत है। दोनों आंकड़ों में अंतर की वजह संस्थानों के शोध के अपने-अपने पैरामीटर हैं।
सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) आईसीएमआर के पीसीओएस नेशनल टास्क फोर्स अध्ययन के लिए राष्ट्रीय समन्वय केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। स्किम्स के निदेशक प्रो. एम. अशरफ गनी पीसीओएस पर लंबे समय से काम काम कर रहे हैं। स्किम्स की रिपोर्ट बताती है कि घाटी में पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में एक समानता पाई गई है। यह समानता है- अधिक चिकनाई युक्त भोजन करना।
पूरे प्रदेश में चल रहा अध्ययन, जल्द सामने आएंगे नतीजे : अब जम्मू संभाग समेत पूरे प्रदेश में पीसीओएस पर अध्ययन किया जा रहा है। आईसीएमआर के सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (एसएमवीडीयू), जम्मू विश्वविद्यालय, कश्मीर विवि और केंद्रीय विवि इस काम में जुटे हैं।
श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (एसएमवीडीयू) के मानव आनुवंशिकी समूह के प्रमुख डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि 2019 से 2024 तक पीसीओएस पर अध्ययन किया गया है। पहली बार इस तरह के अध्ययन में जम्मू की आबादी को शामिल किया गया है। जुटाए गए डेटा का अब विश्लेषण किया जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि यहां भी पीसीओएस पीड़ित महिलाओं का पैटर्न घाटी जैसा ही है या फिर अलग। यह भी पता लगाया जा रहा है कि जम्मू संभाग में पीसीओएस के मामलों के पीछे क्या वजहें हैं।
- डॉ.राकेश बताते हैं कि बहरहाल डेटा के विश्लेषण में अब तक जो पैटर्न देखा गया है उसके मुताबिक, जम्मू संभाग में करीब 22 फीसदी महिलाएं पीसीओएस से पीड़ित हैं। इसमें भी कश्मीर की महिलाओं की संख्या ज्यादा है। कश्मीर में एक तरह का जातीय समूह है, जबकि जम्मू संभाग में मिश्रित आबादी है। अब तक हुए सर्वेक्षण शहरी महिलाओं में ही किए गए है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अध्ययन की जरूरत है। स्कूलों में भी सर्वेक्षण होने चाहिए, ताकि शुरुआत में ही पीसीओएस पीड़ितों की पहचान हो सके।
लक्षण
-अनियमित माहवारी या माहवारी का बिल्कुल न आना
-अत्यधिक बाल उगना।
-मुंहासे या तैलीय त्वचा
-वजन कम करने में कठिनाई या बिना किसी कारण के वजन बढ़ना
-बांझपन या गर्भधारण में समस्या आना
इससे हो सकता है सुधार
-स्वस्थ, संतुलित आहार हार्मोनल असंतुलन में सुधार कर सकता है।
-कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (किसी खाद्य पदार्थ को खाने के बाद रक्त में बढ़ने वाला शुगर का स्तर) वाले खाद्य पदार्थ
प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से परहेज करे
-मेडिटेशन, व्यायाम
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पीसीओएस प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाली बीमारी है। हार्मोनल परिवर्तन से जुड़ी इस समस्या में माहवारी प्रभावित हो जाती है। इसमें या तो कई बार पीरियड्स आते ही नहीं या फिर कई दिनों तक ब्लीडिंग होती रहती है। इस बीमारी में महिला की ओवरी (अंडाशय) के बाहरी किनारे पर तरल पदार्थों से भरे छोटे-छोटे सिस्ट हो सकते हैं। पीसीओएस की दीर्घकालिक समस्या के कारण गर्भधारण में भी दिक्कत हो सकती है।
-डॉ. अरुण गुप्ता, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, आयुर्वेदिक अस्पताल जम्मू