अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बढ़ती मानसिक बीमारियों के बीच जम्मू संभाग के एकमात्र सरकारी मनोरोग अस्पताल की स्थिति चिंताजनक है। यहां प्रतिदिन 300 से 400 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है।
अस्पताल में सिर्फ सात डॉक्टर कार्यरत हैं, जो मरीजों की संख्या के मुकाबले काफी कम हैं। शहर में रेशमघर कॉलोनी में मनोरोग अस्पताल है। यह पहले सिर्फ तीन डॉक्टरों के सहारे चलता था। कुछ समय पहले ही यहां डॉक्टरों की संख्या बढ़ाकर सात की गई लेकिन मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी है। मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
डॉक्टरों पर अतिरिक्त दबाव रहता है। मानसिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति और तनावपूर्ण हो जाती है। इन डॉक्टरों को मरीजों की जांच के साथ-साथ एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्रों को भी पढ़ाना होता है। इसके विपरीत श्रीनगर मनोरोग अस्पताल में 47 डॉक्टर तैनात हैं जबकि ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 100 से 150 रहती है।
मनोरोग अस्पताल जम्मू में कार्यरत एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समस्याएं कई हैं। डॉक्टरों की संख्या काफी कम है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जम्मू संभाग कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर, जिला अस्पताल और जीएमसी में नेशनल मेंटल हेल्थ कार्यक्रम चलता है लेकिन इन अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। इसके कारण पीड़ित लोगों के पास इलाज का एकमात्र विकल्प मनोरोग अस्पताल जम्मू ही होता है।