जम्मू। दो साल से कोविड अस्पताल के रूप में काम कर रहा 200 बिस्तर वाला जच्चा-बच्चा अस्पताल (एमसीएच) गांधीनगर बिना अपने डॉक्टर से चल रहा है। वर्तमान में अस्पताल में कोई कोविड संक्रमित मरीज नहीं हैं, जिस कारण इसे जल्द डिनोटिफाइड करने की तैयारी है। गैर कोविड अस्पताल घोषित होते ही जीएमसी जम्मू और अन्य एसोसिएटेड अस्पताल के डॉक्टर लौट जाएंगे। इसके बाद डॉक्टरों सहित स्टॉफ की कमी पूरी करना चुनौती होगा।
जनवरी 2020 में एमसीएच के लिए 193 संकाय और पैरा मेडिकल स्टाफ के पद सृजित किए गए थे, जिन पर अभी तक नियुक्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में अपने विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। एमसीएच के लिए संकाय और पैरा मेडिकल के पदों के साथ 44 प्रशासनिक/मिनिस्ट्रियल स्टाफ के पद सृजित हैं। संकाय सदस्यों में गायनी, पैथोलाजी, एने स्थियोलाजी, माइक्रोबायोलाजी, रेडियोलाजी विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, लेक्चरर, रजिस्ट्रार, पीजी छात्र और हाउस सर्जन के पद सृजित हैं। लेकिन दो साल में कोविड के चलते इन पदों को भरने के लिए किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है।
वर्तमान की बात करें तो एमसीएच में एक चिकित्सा अधीक्षक, एक मेटरन, सुपर स्पेशलियटी अस्पताल से लेने वाले स्टाफ में 1 स्टोर कीपर, 1 एक्सरे टेक्नीशियन, 1 इलेक्ट्रशियन, दो चालक के अलावा 11 नर्सिंग अर्दली, 1 सीनियर असिस्टेंट हैं। 65 स्टॉफ नर्स को भी नियुक्त किया है। इनमें 6 ही स्थायी हैं। सुरक्षा को आउटसोर्स किया गया है।
विशेषज्ञ सलाहकारों, रजिस्ट्रारों, पोस्ट ग्रेजुएट को जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों से बुलाकर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। कहने को कागजों में पांच प्रोफेसर के पद सृजित हैं, लेकिन मौजूदा एक पर भी नियुक्ति नहीं की गई है। कोविड के दौरान संक्रमित मरीजों की चिकित्सा देखभाल के अलावा एमसीएच में प्रसव सर्जरी सहित अन्य कोविड सर्जरी को अंजाम दिया गया है। डिनोटिफाइड करने से पहले अस्पताल में विभिन्न यूनिटों को शुरू करने के लिए पर्याप्त डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती करना जरूरी है।
कोविड की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। निकट भविष्य में स्थिति को देखने के बाद ही एमसीएच को डिनोटिफाइड किया जाएगा। पर्याप्त स्टाफ तैनाती की जाएगी।
- डॉक्टर शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू