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संक्रमण घटा, पटरी पर लौटने लगी स्वास्थ्य सेवाएं

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जम्मू। कोविड संक्रमण के प्रसार के कम होने से स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौटने लगी हैं। एसोसिएटेड अस्पतालों में पहले की तरह व्यवस्थाओं को बहाल किया जा रहा है। इस कड़ी में जीएमसी से सभी मानसिक रोगियों को वापस उनके साइकाइटरी अस्पताल में भेज दिया गया है। साइकाइटरी अस्पताल में ओपीडी भी शुरू की गई है। इसी तरह सीडी अस्पताल के सभी टीबी मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से नए जच्चा बच्चा गांधीनगर अस्पताल में भेजा जा रहा है। इसके लिए बुनियादी ढांचे को विकसित किया गया है।
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गत मार्च माह में कोविड महामारी के चलते साइकाइटरी अस्पताल को लेवल 3 अस्पताल के रूप में शुरू किया गया था। इस अस्पताल के सभी मरीजों को जीएमसी के विभिन्न वार्डों में शिफ्ट किया गया था। जीएमसी में ही कई महीनों से साइकाइटरी अस्पताल की ओपीडी चल रही थी, लेकिन अब साइकाइटरी अस्पताल को लेवल 3 से बंद करके पुन: बहाल कर दिया गया है। जीएमसी में भर्ती 19 मानसिक रोगियों को वापस साइकाइटरी अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. कीर्ति बी शर्मा ने बताया कि मानसिक रोगियों को साइकाइटरी अस्पताल में सभी उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। उन्हें वापस लाया गया है। अस्पताल में अपनी ओपीडी भी बहाल की गई है। हालांकि अस्पताल में अभी कोविड टेस्टिंग केंद्र चल रहा है, लेकिन वह गैर कोविड यूनिटों से अलग है।
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गांधी नगर अस्पताल में मरीजों के लिए 27 बेड तैयार
इसी तरह नए गांधीनगर जच्चा बच्चा अस्पताल के दूसरे फ्लोर पर टीबी मरीजों के लिए 27 बेड तैयार किए गए हैं। मरीजों के लिए नई एक्सरे कंप्यूटर रेडियोग्राफी मशीन, 100 ऑक्सीजन सिलेंडर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा लेबोरेटरी, थियेटर, अल्ट्रासाउंड सहित आदि बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा रहा है। फिलहाल यहां से मरीजों के सैंपल लेकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भेजे जाएंगे। इसके साथ अस्पताल में 150 बेड कोविड मरीजों के लिए रखे गए हैं। वर्तमान में सीडी अस्पताल के 16 टीबी मरीज सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के वार्ड 2 और 3 में भर्ती हैं, लेकिन सर्जरी शुरू हो जाने के कारण अन्य यूनिटों के मरीजों को ऑपरेशन के बाद बेड की जरूरत पड़ रही है, जिससे टीबी अस्पताल के मरीजों के लिए नए जच्चा-बच्चा गांधीनगर अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण शर्मा का कहना है कि टीबी मरीजों के लिए अलग से वार्ड के शुरू होने से उन्हें राहत मिलेगी। उनकी जरूरत के मुताबिक सभी सामान जुटाया जा रहा है।
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