जम्मू। जम्मू संभाग में मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों और किशोरों की पहचान कर उनकी मानसिक चिकित्सा देखभाल को सुनिश्चित बनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग जिला स्तर पर ऐसे बच्चों को अस्पतालों तक पहुंचाकर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाएगा। इसमें बच्चों की काउंसिलिंग से लेकर हर सुविधाएं दी जाएंगी। कोविड और अन्य कारणों से बच्चों में मानसिक समस्याएं बढ़ी हैं। इसके समाधान के लिए यूनिसेफ के एक कार्यक्रम में जम्मू संभाग में नवंबर में मेंटल हेल्थ साइको सोशल स्पोर्ट योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्टाफ नियुक्त किया जा रहा है। इस योजना के लिए अनुमानित 50 लाख रुपये का बजट तैयार किया गया है।
साइकाइटरी अस्पताल जम्मू की दैनिक 150 से 200 मरीजों की ओपीडी में मानसिक रूप से अस्वस्थ 10 प्रतिशत बच्चे लाए जा रहे हैं। ये बच्चे अवसाद, स्कीजोफ्रेनिया (एक ही चीज में कई स्वरूप देखना) तनाव, लर्निंग डिसऑर्डर, दैनिक जीवन में सक्रिय न होना, बचपन से मानसिक तौर पर ग्रस्त होना आदि मानसिक समस्याओं से पीड़ित हैं। ऐसे बच्चों को शहरी स्तर पर तो मानसिक चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं, लेकिन जिला और दूरदराज क्षेत्रों में ऐसी चिकित्सा सुविधाओं की कमी से बच्चे वंचित हो रहे हैं।
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शून्य से 18 साल तक के बच्चे किए
जाएंगे कवर, हेल्पलाइन नंबर होगा शुरू
साइकाइटरी अस्पताल जम्मू के एचओडी डॉ. मनु अरोड़ा के अनुसार यूनिसेफ के सहयोग से शुरू की जा रही योजना का उद्देश्य मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित उपचार देना है। इसमें 0 से 18 साल तक के बच्चे कवर किए जाएंगे। इसके लिए एक एकीकृत हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया जाएगा। योजना के तहत आउटरीच गतिविधियों में साइको शिक्षा, चाइल्ड केयर संस्थान, स्कूलों में शिक्षकों, आंगनबाड़ी व आशा वर्करों, जिला मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के कर्मचारियों, चाइल्ड लाइन वर्करों, आईसीपीएस स्टाफ आदि को प्रशिक्षित किया जाना है। मानसिक रोगों से बचाव के लिए सामुदायिक साइको शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें हाल ही में सात स्टाफ सदस्यों की नियुक्ति की गई है, जिनमें क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, ट्रेनिंग को-ऑर्डिनेटर, रिमेडियल एजुकेटर, साइकाइट्रिक सोशन वर्कर, काउंसलर, डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। यूनिसेफ से राशि जारी होने के साथ योजना को कार्यान्वयन में लाया जाएगा। वहीं, श्रीनगर में ऐसी गतिविधियां पिछले पांच साल से चल रही हैं।