विजयपुर। रामलीला क्लब मौतलियां कला द्वारा रामलीला का मंच किया गया। इस मौके पर हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुंचे। हनुमान जी लंका में प्रवेश कर चुके थे लेकिन सीता माता का कोई पता नहीं चल रहा था। उन्होंने लंका केमहल, बाग-बगीचे और आसपास का कोना-कोना छान मारा। एक बड़े महल में प्रवेश करने पर हनुमान जी ने देखा कि रावण मदहोशी की हालत में सोया हुआ था और वहां भी सीता माता नहीं थीं। एक क्षण को हनुमान जी के मन में निराशा घर कर गई। वे सोचने लगे कि यदि सीता माता नहीं मिलीं तो श्रीराम को क्या उत्तर दूंगा। हनुमान जी ने आंखें मूंदकर श्रीराम का स्मरण किया। उन्होंने मानसिक रूप से श्रीराम से संवाद करते हुए मार्गदर्शन मांगा। ये वही क्षण था जब एक नए महल की झलक उन्हें मिली और इस महल में सबसे अलग बात यह थी कि वहां एक मंदिर बना हुआ था।
हनुमान जी चौंक गए कि रावण जो संपूर्ण धर्म और भगवान विरोधी था। तभी उन्होंने समझा कि अंधकार के बीच भी उम्मीद का प्रकाश होता है। यही वह संकेत था कि अब कुछ शुभ होने वाला है। इसके बाद हनुमान जी ने फिर से माता सीता की खोज शुरू की और अशोक वाटिका में अंततः माता सीता से हनुमान जी भेंट हो गई।