जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में कहीं आसमान में सुबह और शाम कहीं हेलीकाॅप्टर मंडरा रहे हैं तो शाम होते ही कई इलाकों से फायरिंग की आवाजें आने लगती हैं। पर इस शोर और हलचल से दूर है छंब का ज्यौड़ियां इलाका। फिलहाल यहां शांति है, लोगों की दिनचर्या में कोई बदलाव नही हैं।
दरअसल, बलिदानियों की भूमि कहलाने वाला यह क्षेत्र हमेशा हाई अलर्ट पर रहता है। यहां के लोग कहते हैं कि सतर्कता हमारी आदतों में हैं, डर हमें लगता नहीं है। क्योंकि हमारे घरों का हर बच्चा सरहद की रक्षा के संकल्प के साथ बड़ा होता है। अमर उजाला संवाद की टीम ने 30 पंचायतों वाले इस इलाके के गांवों के लोगों से मौजूदा हालात को जानने की कोशिश की।
पर ये आस टूटती नजर आ रही...पंचायत पलांवाला मोहल्ला टीसीपी के निवासी रिटायर्ड सुबेदार गुलबदन सिंह कहते हैं कि युद्ध से डर नहीं, हम लड़ने को हमेशा तैयार रहते हैं। पर दोनों देशों के बीच तनाव से हमारी एक आस टूटती नजर आ रही है।
दरअसल, कारगिल युद्ध के दौरान से सेना ने किसानों की जमीन अधिग्रहित की थी। सरकार उसे हमें वापस करने की योजना बना रही थी, इस खबर से हम सब बहुत खुश थे। पहलगाम हमले के बाद से दोनों देशों के बीच बनी तनातनी से हमारी आस फिर से टूटती नजर आ रही है, लेकिन जो अब हमारे पास है, हम लोग उसी में से अपना गुजर बसर कर रहे हैं। किसान गेहूं की फसल समेट कर बेच भी रहे हैं। लोगों ने बताया कि हम लोग युद्धों में पहले की काफी नुकसान सह चुके हैं। इसलिए दोनों देशों के बीच शांति बनी रहे।
प्रार्थना तो यही है युद्ध न हो, हो जाएगा तो हम तैयार हैं
रिटायर्ड सूबेदार गुलबदन सिंह कहते हैं कि युद्ध न हो, ऐसी प्रार्थना करते हैं, पर हो जाएगा तो हम तैयार हैं। साथ-साथ आगे बढ़ते हुए बलिदानी सिपाही बिक्रम सिंह की याद में पलांवाला में बनाए गए स्मृति स्मारक पर ले जाते हैं। कहते हैं कि यहां तो हर मां ने अपने लाल को भारत माता को सौंप दिया है। सूबेदार गुलबदन बताते हैं कि मेरा बच्चा भी सेना में है।
फसल कटी, बेचकर तनाव मुक्त हो जाएंगे
गांव बदोवाल निवासी किसान मोठू राम अपने बैलों को पानी पिलाने के लिए नहर पर ले जा रहे थे। पूछने पर कहते हैं कि पहलगाम हमले के बाद से ही सभी ने फसलों की कटाई तेज कर दी थी। गांव के ज्यादातर लोगों ने फसलें काट ली है, अब सभी इसे बेचने में जुटे हैं। थोड़ा आगे बढ़ने पर पलांवाला दढखौड़ में गेहूं की फसल बेचने आए किसानों ने बताया कि फसल बिक जाएगी तो हम तनाव मुक्त हो जाएंगे।
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गर्व है इन पर : इसी गांव के थे ये बलिदानी
अनिल सिंह मनहास, विक्रम सिंह, विजय सिंह मट्टू, कृष्णन लाल, विशाल शर्मा
यहां की दो प्रमुख घटनाएं...
- 11 अप्रैल 2025 की रात को केरी बट्टल में फायरिंग में शहीद हुआ था जवान
- 28 दिसंबर 2024 को बट्टलले शिव आसन मंदिर में तीन आतंकवादियों को भारतीय सेना ने मार गिराया था
हम अपना घर छोड़कर नहीं जाएंगे
गांव गिघडे़याल में खेतों में दाल की फसल की गुड़ाई करते हुए मिले पति-पत्नी उत्तम लाल और तरीपता देवी। कहते हैं कि हां, सुन रहे हैं कि तनाव बढ़ रहा है। पर हमारे लिए यह सब बहुत सामान्य बात है। गोलियों की आवाज से डर नहीं लगता है, क्योंकि इस गांव के बच्चे बड़े ही इस सोच के साथ होते हैं कि उन्हें सरहद की रक्षा के लिए बंदूकें उठानी हैं। तरीपता देवी कहती हैं कि फायरिंग रेज में है हमारा गांव पर हम कहीं नहीं जाएंगे।