सार्वजनिक परिवहन श्रेणी के वाहन जल्द ही जीपीएस तकनीक से जोड़े जाएंगे। जीपीएस के माध्यम से यह वाहन राज्य के अलावा बाहरी राज्यों में होने के बावजूद लगातार सरकारी रडार पर रहेंगे।
दो वर्ष पूर्व से लंबित इस व्यवस्था को जल्द लागू किया जाएगा। गौरतलब है कि गैंगरेप की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने तमाम राज्यों को जीपीएस की मदद लेने संबंधी निर्देश दिए थे।
परिवहन मंत्री अब्दुल गनी कोहली ने कठुआ दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार ने बाकायदा इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। कॉमर्शियल श्रेणी के मालवाहक और यात्री वाहनों को जीपीएस प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
मंत्री ने कहा कि ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम से जुड़ने के बाद वाहनों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे वाहनों को रूट परमिट के हिसाब से चलने की बाध्यता का सामना करना पड़ेगा। वहीं यात्रियों की सुरक्षा का पहलू भी प्राथमिकता से लिया जा सकेगा।
मंत्री ने कहा कि कॉमर्शियल वाहनों पर जीपीएस लगाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए थे। लंबे समय से यह कार्य अधर में था, लेकिन अब सरकार इसे प्राथमिकता से हकीकत में बदलने जा रही है।
रियासत के तमाम कॉमर्शियल वाहन जीपीएस के माध्यम से ट्रैक किए जा सकेंगे। जीपीएस से आपात स्थिति के दौरान वाहनों को लोकेट करना और जरूरी कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।