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अलगाववादियों की सुरक्षा पर खर्च दिए 60 करोड़

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गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे जम्मू कश्मीर पर वीआईपी सुरक्षा पर होने वाले खर्च का बोझ भारी पड़ रहा है। रियासत में वैसे सैकड़ों लोग सुरक्षा के घेरे में हैं जिन पर कोई सरकारी और संवैधानिक दायित्व नहीं है। कश्मीर को देश से अलग करने की बात करने वाले अलगाववादी नेताओं को भी रियासत सरकार ने सुरक्षा मुहैया कराई है।
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ऐसे अलगाववादियों की सुरक्षा पर पांच साल में 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह देश का पहला राज्य है जहां सुरक्षा कवर के तहत संबंधित व्यक्ति को आवास सुविधा भी दी जाती है। ऐसे व्यक्तियों को बाहरी राज्यों के दौरे के क्रम में होटल सुविधा भी दी जाती है।

पिछले पांच साल में वीआईपी सुरक्षा पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। सियासी हस्तियों की सुरक्षा पर होने वाले खर्चों के बारे में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने दो बार विधानसभा में लिखित जानकारी दी है।
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हर महीने दस करोड़ का खर्चा

लेकिन, इस लिखित उत्तर में सुरक्षा प्राप्त अलगाववादियों का विवरण नहीं दिया गया है। सुरक्षा कारणों से यह जानकारी देने से इनकार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक हुर्रियत के दो प्रमुख नेताओं सैयद अली शाह गिलानी और उदारवादी गुट के मीरवाइज उमर फारूक की सुरक्षा में 200 जवानों को तैनात किया गया है।

अलगाववादियों की सुरक्षा में हर साल कम से कम 10 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सरकार की ओर से सदन को सुरक्षा कवर के संबंध में दी गई जानकारी में शामिल लोगों की संख्या में भी अंतर है।

विधायक आर एस पठानिया के सवाल पर दिए गए उत्तर में सरकार की ओर से कहा गया है कि सुरक्षा घेरे में 1270 वीआईपी हैं जबकि इससे पहले विधायक राजेश गुप्ता के सवाल के उत्तर में इस संख्या को 1472 बताया गया था। सरकारी जवाब में कहा गया है कि सुरक्षा घेरे में शामिल तमाम लोगों की सुरक्षा पर हर महीने 10 करोड़ 88 लाख 53 हजार 460 रुपये खर्च होते हैं।
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वीआईपी मद में 118 करोड़ खर्च

वीआईपी सुरक्षा के क्रम में डीजल-पेट्रोल पर 5 करोड़ 56 लाख 7 हजार 721 रुपये, होटल सुविधा पर 45 लाख 44 हजार 403 रुपये, आवासीय गार्ड पर 4 करोड़ 39 लाख 70 हजार 841 रुपये खर्च होते हैं।

रियासत में 481 सियासी लोगों को 708 वाहन मुहैया कराए गए हैं। इनमें से 337 लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई सरकारी या संवैधानिक दायित्व नहीं है।

जानमाल पर खतरे के मद्देनजर 440 लोगों को होटल सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। इस साल वीआईपी सुरक्षा मद में अब तक 118 करोड़ से अधिक रुपये खर्च हो चुके हैं।

सियासी एक्टिविस्ट पर 2012-13 में 101 करोड़ और 2013-14 में 107 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
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