मुख्य विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस(नेकां) के सभी एमएलए और एमएलसी ने बुधवार को विधानसभा सहित विधान परिषद की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विधानसभा के बाहर धरना भी दिया।
साथ ही पीडीपी-भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विधायक नेकां के चार सदस्यों के निलंबन वापसी की मांग कर रहे थे।
धरने में विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला समेत सभी नेकां एमएलए और एमएलसी शामिल थे। उन्होंने मोदी-मुफ्ती के खिलाफ नारे लगाए। साथ ही ‘नागपुर के फैसले नहीं चलेंगे,’ जैसे नारे लगाए।
उमर ने कहा कि हम अपनी मर्जी से धरना नहीं दे रहे, बल्कि हमें मजबूर किया गया है। कहा कि जब भी विपक्ष किसी मुद्दे पर चर्चा करना चाहता है, चाहे वह बीफ बैन हो या फिर 35ए का मुद्दा, सरकार स्पीकर के पीछे शरण लेती है।
वहीं स्पीकर यह कहकर कि मुद्दा न्यायाधीन है, सुप्रीम कोर्ट के पीछे शरण लेते हैं। उमर ने आरोप लगाया कि स्पीकर और चेयरमैन दोनों सरकार के इशारों पर चलते हुए विपक्ष की आवाज को दबाते हैं।
यह भी कहा कि बेल में कांग्रेस भी हंगामा कर रही थी, लेकिन सिर्फ नेकां के विधायकों को निलंबित कर विपक्षी दलों में फूट डालने की कोशिश की गई।