हाईकोर्ट के जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि सरकार के पास किसी भी मुलाजिम का कभी भी तबादला करने का कानूनी अधिकार है।
सरकार के एक फैसले के खिलाफ पुरुषोत्तम लाल की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह कानूनी अधिकार है और इस मामले में कोई भी तर्क स्वीकार नहीं होगा।
याचिकाकर्ता ने समय से पहले अपने तबादले के आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। अदालत में उपस्थित एडिशनल एडवोकेट जनरल अहसान मिर्जा ने दलील दी कि इस तरह के मामले में हाईकोर्ट की फुल बेंच पहले भी फैसला दे चुकी है।
सरकार के पास अधिकार है कि आपात स्थितियों या फिर जहां किसी मुलाजिम की जरूरत हो, वहां उसे स्थानांतरित किया जा सकता है। ताकि प्रशासनिक कामकाज में किसी प्रकार की समस्या न हो।
एएजी ने अदालत से आग्रह किया कि वैसे मुलाजिम ही समय से पहले तबादले का तर्क देते हैं, जिनका इरादा अपनी ड्यूटी से भागना होता है।
उन्होंने अदालत से अपील की कि इस याचिका को खारिज किया जाए, ताकि अन्य मुलाजिमों के लिए भी यह सबक बने। सरकार को जिस स्थान पर उनकी जरूरत है, उन्हें वहां काम करना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर ने कहा कि याचिकाकर्ता के तर्क में कोई दम नहीं है और याचिका को खारिज किया जाता है।