राज्यपाल एनएन वोहरा ने कहा है कि सरकार कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है। उनमें असुरक्षा की भावना को पूरी तरह से खत्म करते हुए बसाया जाएगा। इसके साथ ही पीओके शरणार्थियों को राहत राशि वितरित करने के तौर तरीकों पर केंद्र से परामर्श कर अंतिम रूप दिया जा रहा है।
पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों के मामले में गठित समिति विचार-विमर्श कर रही है। सरकार जल्द ही नगर निगम चुनाव कराने को प्रतिबद्ध है। साथ ही इस साल होने वाले पंचायत चुनाव को भी शीघ्र कराएगी। वह शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेशन सेंटर में बजट सत्र के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि राज्य सरकार जम्मू-कश्मीर को भारत के संविधान में प्राप्त विशेष दर्जे की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है। इसे पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के एजेंडा आफ एलायंस में लिखा भी गया है। यह खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री उप महाद्वीप में शांति के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।
कहने की जरूरत नहीं कि राज्य में सामान्य माहौल बनाने में इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान तक पहुंचने की प्रधानमंत्री की साहसिक पहल का राज्य में स्वागत किया गया। इससे शांति और सीमा पर रहने वाले लोगों में आशा पुनर्जीवित हुई है। राज्य सरकार सुलह और विकास को प्राप्त करने के लिए शांति तथा वार्ता की राह को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्य के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पड़ोसी देश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों से राज्य में शांति तथा सामान्य स्थिति की बहाली की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग जो हर वक्त असुरक्षा महसूस करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वास बहाली के उपाय के रूप में भारत सरकार के सहयोग से नियंत्रण रेखा के पार व्यापार विस्तार के उन्नयन के लिए सरकार ने प्रयास किया है। इसके तहत व्यापार सुविधा केंद्र के बुनियादी ढांचे को बढ़ाया गया है।
संचार प्रणाली को मजबूत किया गया है। भारत सरकार और आरबीआई के परामर्श से बैंकिंग सुविधाओं का ढांचा स्थापित करने के लिए हाल में कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार सीमा पर्यटन विशेष रूप से सुचेतगढ़ और चमलियाल को विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।